रंग बदलने वाले नेताओं के साथ तुलना गलत : आप की अदालत में गिरगिट

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By Jayjeet

रजत शर्मा की आप की अदालत में इस बार गिरगिट कुमार पर मुकदमा चलाया जा रहा है। पढ़िए हास्य और व्यंग्य से भरपूर ये मजेदार स्किट :

उद्घोषणा : ‘आप की अदालत’ में हमने आज तक कई हस्तियों पर मुकदमे चलाए। इनमें नेता, सेलेब्रिटी से लेकर बाबा तक शामिल हैं। होली से तीन दिन पहले आज हम पहली बार एक ऐसी शख्सियत पर मुकदमा चलाने जा रहे हैं जिनके बगैर राजनीति पूरी नहीं होती। आज हम चलाएंगे गिरगिट कुमार पर मुकदमा। जनता की तरफ से मामले की पैरवी करेंगे जाने-माने पत्रकार रजत शर्मा। जज होंगे गिरगिट मामलों के विशेषज्ञ डॉ. कमेलियन सिंह। तो शुरू करते हैं आज की कार्यवाही।

आरोप : गिरगिट कुमार पर आरोप है कि उनके कारण ही नेताओं ने रंग बदलना सीखा।

रजत शर्मा : जिस तरह से आप अपना रंग बदलते हैं, आपको देख-देखकर भारतीय नेता भी रंग बदलने लगे हैं।
गिरगिट कुमार: ऐसा तो नहीं है। मैंने तो आज तक सभी नेताओं काे सफेद झक्क कपड़ों में ही देखा है। हां, कोई-कोई भगवा दुपट्‌टा ओड़ लेता है तो कोई नेहरू टोपी या लाल टोपी लगा लेता है।

रजत शर्मा : मैं नेताओं के कपड़ाें की बात नहीं कर रहा हूं, उनके चाल-चरित्र की बात कर रहा हूं।
गिरगिट कुमार: चलिए, चरित्र भी देख लीजिए। हर चरित्र पर काले धब्बे ही तो हैं। कहां रंग बदला? जैसे धब्बे पहले थे, वैसे धब्बे आज हैं। एकदम काले-काले।

रजत शर्मा : आप बहस को दूसरी दिशा में मोड़ रहे हैं। नेता चाहे किसी भी पार्टी के हों, सत्ता मिलते ही बदल जाते हैं या सत्ता के लालच पाला बदल लेते हैं, जैसे आप रंग बदल लेते हों।
गिरगिट कुमार : रजतजी, यह तो आप ज्यादती कर रहे हैं। नेताओं के साथ हमारी तुलना ठीक नहीं है।

रजत शर्मा : लेकिन उन्हें रंग बदलना आपने ही तो सिखाया ना? यह बात मानते क्यों नहीं?
गिरगिट कुमार (उत्तेजित होते हुए) : खामोश! हम रंग बदलते हैं क्योंकि प्रकृति ने हमें इसकी अनुमति दी है। आपके नेता रंग बदलते हैं अपने स्वार्थ के कारण। इसलिए कहे देते हैं, अपने नेताओं की तुलना हमसे तो न कीजिए।

रजत शर्मा (हंसते हुए) : फिर भी लोग कहने से कहा चुकते हैं कि नेताओं ने गिरगिट की तरह रंग बदल लिया।
गिरगिट कुमार : हां, जब लोग, ज्यादातर मीडिया वाले ऐसी बातें करते हैं तो हमारे आत्मसम्मान को गहरा धक्का पहुंचता है।

रजत शर्मा : नहीं, मीडिया वाले तो वही दिखाते हैं जो सच है और सच यह है कि आपमें तथा नेताओं में कोई अंतर नहीं है।
गिरगिट कुमार : माफ करना रजत जी। अगर ऐसा ही है तो फिर तो हममें और मीडिया वालों में भी कोई अंतर नहीं है। क्या आप सत्ता देखकर रंग नहीं बदलते? बताइए, बताइए!!!

रजत शर्मा (जल्दी में दर्शकों को संबोधित करते हुए): गिरगिटजी कुछ ज्यादा ही भावुक हो चले हैं। इसलिए सवाल-जवाब का सिलसिला हम यहीं रोकते हैं। जज साहब का फैसला हम कभी बाद में सुन लेंगे, नमस्कार।