कांग्रेस को मिला धारदार मुद्दा, गुजरात चुनावों के बाद सरकार की बजाएगी ईंट से ईंट

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ईवीएम पर हम सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे...

नई दिल्ली। कांग्रेस सहित देश की तमाम विपक्षी पार्टियों को सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ एक धारदार मुद्दा मिल गया है। आगामी गुजरात विधानसभा चुनावों में हार के बाद विपक्षी कांग्रेस इस मुद्दे पर रैलियां व धरने आयोजित कर सरकार की ऐसी की तैसी कर देगी।

क्या है यह मुद्दा?

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने hindisatire.com के साथ बातचीत में इसका खुलासा किया। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश :
सवाल : किस मुद्दे को लेकर आप इतने एक्साइटेड हैं?
जवाब : हमें भेतरीन मुद्दा मिला है जिसका सत्ताधारी पार्टी को जवाब देते नहीं बनेगा। हम जनता को बताएंगे कि ये बीजेपी वाले ईवीएम में गड़बड़ी करके सत्ता में आ रहे हैं।

सवाल :
कैसे गड़बड़ी कर लेते हैं?
जवाब : चुनाव आयोग के साथ मिलकर ये सारी ईवीएम में ऐसी इंजीनियरिंग करते हैं कि हर वोट इनको ही जाता है।

सवाल : चुनाव आयोग इनके दबाव में कैसे आ जाता है?
जवाब : अगर आप सत्ता में हों तो सबको दबा सकते हैं?

सवाल : लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में तो आप सत्ता में थे। तो तब इन्होंने चुनाव आयोग को कैसे दबा लिया?
जवाब : अरे, ऐसे बुड़बक टाइप के सवाल छोड़ दो भाई, मुद्दे पर आओ।

सवाल : ठीक है मुद्दे पर आते हैं। आप ईवीएम के मुद्दे पर सरकार को कैसे घेरेंगे?
जवाब : हम हर राज्य, शहर, गांव में प्रदर्शन करके ईवीएम के मुद्दे को इतना हाइप देंगे कि सरकार को बैलट पेपर से चुनाव करवाने को मजबूर कर देंगे। फिर देखिए, हम जीतते हैं कि वे?

सवाल : जीएसटी, नोटबंदी, महंगाई जैसे जो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, उनका क्या होगा?
जवाब : वे हम बाद में उठा लेंगे।

सवाल : लेकिन देश के सामने तो इस समय सबसे बड़ा मसला यही है कि युवाओं के लिए रोजगार नहीं है। क्या आपको पहले इस मुद्दे पर सड़कों पर नहीं उतरना चाहिए?
जवाब : अब आप हमें बताएंगे कि कौन-से इश्यू उठाने चाहिए? डेमोक्रेसी की रक्षा ज्यादा जरूरी है। चलिए, अभी चलते हैं। राहुल बाबा को पार्टी का अगला अध्यक्ष बनवाना है। फिर डेमोक्रेसी पर विस्तार से बात करेंगे।

अब जानते हैं EVM यानी Electronic Voting Machine के 5 Facts:

1. एक EVM में अधिकतम 3840 वोट आ सकते हैं। आमतौर पर किसी भी एक पोलिंग बूथ पर वोटर्स की संख्या 2000 से अधिक नही होती है। ज्यादा संख्या होने पर मशीन की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

2. EVM अधिकतम 64 कैंडिडेट्स के लिए काम कर सकती है। अगर कैंडिडेट इससे भी ज्यादा हैं तो उस निर्वाचन क्षेत्र में फिर पारंपरिक तरीके से मतपत्रों के जरिए ही वोटिंग करवानी पड़ती है।

3. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को Bharat Electronics Limited और Electronic Corporation of India Limited तैयार करता है।

4. साल 1980 में एच.बी. हनीफा ने भारत की पहली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को इंवेंट किया था।

5. 1989-90 में एक्सपेरिमेंटल तौर पर पहली बार नवंबर 1998 में आयोजित 16 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में EVM का इस्तेमाल किया गया था। इन 16 विधानसभा सीटों में से मध्यप्रदेश और राजस्थान में 5-5 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में 6 सीटें थीं।

क्या EVM से बूथ कैप्चरिंग पर रोक लगी है?

चुनाव आयोग की वेबसाइट में यही दावा किया गया है। आयोग के अनुसार ईवीएम की प्रोग्रामिंग इस तरह की गई है कि एक मशीन एक मिनट में केवल 5 वोट ही दर्ज कर सकती है। यानी अगर कोई EVM पर कब्जा कर लें तो भी एक घंटे में अधिकतम 300 वोट ही डाले जा सकते हैं। इसके अलावा मतदान केंद्र के भीतर गड़बड़ी की आशंका देखते ही पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी ‘बंद’ का बटन दबा दें तो इसके बाद एक भी वोट नहीं डाला जा सकता, भले ही उपद्रवी ईवीएम को तोड़ दें। ईवीएम को तोड़ने के बाद भी अगर चिप सुरक्षित है तो जितने वोट डाले गए हैं, उनका रिकॉर्ड भी सेफ रहता है।

(Disclaimer : पहला पार्ट काल्पनिक है। मकसद केवल Political Satire करना है। खबर का दूसरा पार्ट फैक्ट्स पर आधारित है।)