Not Funny : चाइनीज प्रोडक्ट्स के बायकॉट के इस दौर में हम जय श्री भैरू भवानी वाले से क्या सीख सकते हैं?

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By Jayjeet

हम इस सवाल का जवाब जानें, उससे पहले एक नजर इस ठेले पर डाल लेने का आग्रह करता हूं। मंचुरियन, चाऊमिन से लेकर अमेरिकन चोप्सी तक यहां सबकुछ बिक रहा है। और यह भी पक्की बात है कि इन तमाम चीजों में शिमला मिर्च, सोयाबड़ी से लेकर पत्तागोभी जैसे चीजें होंगी। सॉसेस के नाम पर होगा तीखी मिर्च का पेस्ट…।

वापस सवाल पर आते हैं। जय श्री भैरू भवानी वाले से या भारत में चाऊमिन/मंचुरियन बेचने वालों से हम क्या सीखें? यही कि कैसे हमने शुद्ध चाइनीज प्रोडक्ट में अपनी हैसियत, अपनी टेस्ट हैबिट और अपने परिवेश के मुताबिक बदलाव करके एक ऐसी चीज बना दी जो चाइनीज होते भी हमारी है। क्या हमें ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर भैरू भवानी की चाऊमिन का विरोध करने की जरूरत है? बिल्कुल नहीं। हम इसे मजे से खा सकते हैं, बगैर इस ग्लानि के कि यह चाइनीज है। इसकी धेले भर की रॉयल्टी भी चाइना को नहीं मिलने वाली।

तो जरूरत इस बात की है कि हम महज चाइनीज चीजों के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने के थोथे नारों से ऊपर उठें और यह देखें कि हम किन चाइनीज प्रोडक्ट्स को मेड इन इंडिया बना सकते हैं। जिन्हें बना सकते हैं, उन्हें बनाइए। जिन्हें नहीं बना सकते, उनका तब तक के लिए इस्तेमाल कीजिए जब तक कि उनका उचित विकल्प नहीं मिल जाता। क्योंकि देश की जरूरतों और देश के हितों के मुताबिक जमीनी व्याहारिकता पर चलना ही आज असली राष्ट्रभक्ति है।