नए साल की नई उम्मीद, नेताओं के अल्जाइमर का होगा इलाज

हिंदी सटायर डेस्क, बेंगलुरु। नया साल एक नई उम्मीद लेकर आया है। इंडियन पोलिटिकल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार भारतीय नेताओं के अल्जाइमर का जल्दी ही इलाज संभव हो सकेगा। गौरतलब है कि सत्ता में आने पर वादों को भूल जाना नेताओं की आम बीमारी रही है।

शोध पत्र के सहलेखक डॉ प्रवीण मुनोरिया के अनुसार अल्जाइमर में व्यक्ति को भूलने की बीमारी (memory loss) हो जाती है। इसका कोई इलाज नहीं है, खासकर सत्ता में आते ही नेता इस बीमारी से ग्रस्त हो जाता है। लेकिन डॉ. मुनोरिया के नेतृत्व में बेंगलुरु स्थित निम्हान्स रिसर्च सेंटर में कुछ चूहों पर सफल परीक्षण किया गया है। इन चूहों पर public pressure नामक दवा का प्रयोग किया गया। इस प्रयोग में दवा देने से पहले चूहों को एक कुर्सी पर चढ़ाया गया। कुर्सी पर चढ़ते ही चूहे वे सब कुछ भूल चुके थे, जो उन्हें पहले याद था। लेकिन इस दवा का डोज देने के बाद जब चूहों को दोबारा कुर्सी पर चढ़ाया गया तो उन्हें धीरे-धीरे कुछ बातें याद आने लगीं।

डॉ. मुनोरिया के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती public pressure को विकसित करना होगा। चूहों में तो यह परीक्षण कर लिया गया, लेकिन भारतीय जनता के बीच public pressure बनाना काफी मुश्किल काम है। जिस दिन यह बन जाएगा, उस दिन से नेताओं के अल्जाइमर का इलाज आसानी से हो जाएगा।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं। )