जब भी घर में घुसो, मुंह लटकाकर घुसो : सुरेंद्र शर्मा

हास्य रस के कवि सुरेंद्र शर्मा (Surendra Sharma) पति-पत्नी संबंधी नोक-झोंक वाली कविताओं के लिए जाने जाते हैं। यहां ऐसी ही दो कविताएं पेश हैं (साथ ही वीडियो भी देख सकते हैं।) 

हास्य कविता 1 :

जब भी घर में घुसो, मुंह लटकाकर घुसो
लुगई समझ जाएगी, कंट्रोल में है…

हंसकर घुसोगे तो पचास सवाल करेगी
किसके साथ बैठा
घर में ही सूजा पड़ा रहता
बाहर कैसे हंसकर आया, बता तो सही…

उसको लगता, मेरे जीते जी
इसके हंसने की हिम्मत कैसे हो गई…

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हास्य कविता 2 :

मैंने अपनी पत्नी से कहा,
“संत महात्मा कह गए हैं……
ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी
ये सब ताड़न के अधिकारी…
इन सभी को पीटना चाहिए!!”
इसका अर्थ समझती हो या समझाएं?
पत्नी बोली-
“हे स्वामी, इसका मतलब तो बिलकुल साफ है
इसमें एक जगह मैं हूं और चार जगह आप हैं।”

– सुरेंद्र शर्मा