ह्यूम ने भी इस्तीफा भेजा, गांधीजी भी अड़े, नेहरू व अन्य नेताओं पर बढ़ा दबाव

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राहुल गांधी गूगल पर यह चेक करते कि आखिर ये ए. ओ. ह्यूम थे कौन?

By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। कांग्रेस में इस्तीफों का दौर जारी है। अब तक 56 हजार इस्तीफों के बाद अंतत: वो इस्तीफा भी आ गया, जिसका कि पूरी कांग्रेस को कई दिनों से इंतजार था यानी ए. ओ. ह्यूम का इस्तीफा।

सूत्रों के अनुसार सालों से ऊप्पर चैन की नींद सो रहे कांग्रेस पार्टी के संस्थापक ए.ओ. ह्यूम की नींद उसी दिन से उड़ गई थी, जिस दिन राहुल गांधी ने अपना इस्तीफा देते हुए कहा था कि कांग्रेस के बाकी वरिष्ठ नेताओं की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उप्पर के सूत्रों के अनुसार इस बयान के बाद से ही ह्यूम दो रात तक सोए नहीं। इस बारे में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष रहे व्योमेश चंद्र बैनर्जी से भी चर्चा भी। ह्यूम ने अपनी दाढ़ी नोंचते हुए कहा कि राहुल बाबा का इशारा मेरी ओर है क्योंकि पार्टी तो मैंने ही बनाई थी। अगर मैं पार्टी ही नहीं बनाता तो आज इसकी ऐसी दुर्गति भी नहीं होती। हालांकि बैनर्जी ने ह्यूम को बहुत समझाया कि राहुल की बात को इतना दिल पर मत लो। मैं राहुल को बचपन से जानता हूं। बहुत सीधा बच्चा है। उसने तो तुम्हारा नाम भी नहीं सुना होगा। इसलिए तुम ये मत सोचो कि वो तुमसे इस्तीफा मांग रहा है। लेकिन ह्यूम ने उनकी एक न सुनी और आज सुबह इस्तीफा भिजवा दिया। बाद में उन्होंने एक ट्वीट कर भी अपने इस्तीफे की पुष्टि कर दी।

गांधीजी भी इस्तीफा देने पर अड़े :

ह्यूम के इस इस्तीफे से ऊप्पर काफी खलबली मच गई है। अपुष्ट खबरों के अनुसार गांधीजी काफी सालों के बाद फिर अपनी वाली गांधीगीरी पर उतर आए हैं। वे नेहरूजी से यह कहते सुने गए कि इस्तीफा तो मुझे भी देना चाहिए क्योंकि आजादी के बाद मैं कांग्रेस को भंग करवाने में विफल रहा। अगर उस समय मैं दो-चार दिन के लिए उपवास पर बैठ जाता तो कांग्रेस भंग हो जाती और आज यह स्थिति नहीं देखनी पड़ती।

अंतिम समाचार लिखे जाने तक नेहरूजी अपने प्रिय बापू को इस्तीफा न देने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे थे। क्योंकि गांधीजी द्वारा इस्तीफा देते ही खुद नेहरू और उनके समकक्ष अन्य वरिष्ठ कांग्रेसियों पर भी इस्तीफे का नैतिक दबाव बढ़ जाएगा जिन्होंने उस समय गांधीजी की कांग्रेस को भंग करने की मांग ठुकरा दी थी।

(Disclaimer : यह केवल एक काल्पनिक खबर है जो कटाक्ष के मकसद से लिखी गई है। इसका मकसद किसी का भी मजाक उड़ाना या उसकी मानहानि करना नहीं है।)