कैसे बाबा रामदेव को नोबेल पुरस्कार मिलते-मिलते रह गया! एक सच्ची कहानी!

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हिंदी सटायर डेस्क। नोबेल पुरस्कार की दनादन घोषणा हो रही है। बाबा रामदेव भी इस अवार्ड के लिए प्रबल दावेदार थे। लेकिन उन्हें अवार्ड मिलते-मिलते रह गया। इस संबंध में हिंदी सटायर के रिपोर्टर ने नोबेल कमेटी में जबरन घुसपैठ कर वहां बैठे एक सूत्र से बात की तो उसने बताई पूरी कहानी।

रिपोर्टर : बाबाजी भी अवार्ड की लाइन में थे। एक आधा अवार्ड तो उन्हें भी मिल जाना चाहिए था। फिर क्या हुआ?

नोबेल कमेटी का घुसपैठिया सूत्र : मिल भी जाता, पर एक लोचा हो लिया।

रिपोर्टर : ऐसा कौन-सा लोचा हो लिया?

सूत्र : अब क्या बताएं। बाबा रामदेव जी तो एक नहीं, चार-चार कैटेगरी में नॉमिनेट थे।

रिपोर्टर : अरे, कैसे? और ये चार कौन-सी कैटेगरी हैं?

सूत्र : एक, चिकित्सा के लिए।

रिपोर्टर : हां, इसमें तो बहुत टॉप का काम कर रहे हैं अपने बाबा। इसमें तो मिलना ही था। पर दूसरी कैटेगरी में और कहां टांग घुसा ली इन्होंने?

सूत्र : यही तो प्रॉब्लम हो गई। उन्हें मुगालता हो गया कि 5 रुपए से कारोबार को बढ़ाकर 5 हजार करोड़ का कर लिया तो इकोनॉमी के लिए अवार्ड मिलना चाहिए। ‘ओम शांति ओम’ शो में काम कर लिया तो पीस के लिए भी अप्लाई कर दिया। इतना ही नहीं, किसी ने बाबा को कह दिया कि आप तो केमिस्ट्री में भी माहिर हैं- योग एंड पॉलिटिक्स की केमिस्ट्री। बस, बाबाजी ने यहां भी टांग घुसेड़ दी।

रिपोर्टर: तो इससे क्या हो गया?

सूत्र : चार-चार नॉमिनेशन से कमेटी वाले चकरा गए। इतने कन्फ्यूज हो गए कि बाबाजी को नोबेल अवार्ड आगे के लिए टाल दिया गया।

(Disclaimer : यह केवल काल्पनिक इंटरव्यू है। केवल हास्य-व्यंग्य के लिए लिखा गया है। )