Bank-Scam : हे भगवान! घोटालेबाज बैंकर्स ने ये क्या मांग लिया?

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(Bank-Scam/Bank Gotale in India) हिंदी सटायर डेस्क। बैंकों में सामने आ रहे नित नए-नए घोटालों के बाद अब घोटालेबाज बैंकर्स ने भी जरूरत पड़ने पर सम्मानपूर्वक विदेश भागने की अनुमति मांगी है। हाल ही में गठित घोटालेबाज बैंकर्स की ऑल इंडिया कमेटी ने इस संबंध में पारित एक प्रस्ताव में यह मांग की है। प्रस्ताव में कहा गया है – जब बैंकों में घोटाले करने वाले लोगों को सम्मानपूर्वक विदेश भागने दिया सकता है तो इन घोटालों में सहयोग प्रदान करने वाले बैंकर्स ने क्या बिगाड़ा है? उन्हें भी यह सुविधा मिलनी ही चाहिए।

प्रस्ताव में आगे कहा गया – नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और यहां तक कि विजय माल्या को पहले कौन जानता था? ये केवल अपने टैलेंट के बल पर ही जन-जन में इतने लोकप्रिय नहीं हुए। इनकी प्रतिभा को निखारने में हम घोटालेबाल बैंकर्स की भी खास भूमिका रही है। लेकिन घोटाले सामने आने के बाद नीरव मोदी, राहुल चौकसी और विजय माल्या को तो स-सम्मान विदेश भागने का रास्ता दिया गया, लेकिन हमारे लिए इस तरह की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की गई है। जरूरत पड़ने पर हम भी तुरंत भारत से बाहर भाग सकें, इसका दायित्व सरकार का है। सरकार अपने इस दायित्व से मुंह नहीं मोड़ सकती।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि नीरव, राहुल चौकसी और विजय माल्या जैसे स्वनाम धन्य लोगों का तो अपना नेटवर्क है। इसलिए भागने से पहले उनके लिए वीजा इत्यादि की सुविधाएं जुटाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन हम गरीब घोटालेबैंक बैंकर्स के पास इतना समय नहीं है कि पहले से ही वीजा जैसी फॉर्मलिटीज पूरी कर सकें। हमारा पूरा समय घोटालों की बैलेंस शीट को एडजस्ट करने में ही बीत जाता है। इसलिए सरकार को हमें एडवांस में ही ब्लैंक वीजा प्रोवाइड करने चाहिए, ताकि घोटाले में जिस भी बैंकर का नाम आए, वीजा में वह अपना नाम भरकर स-सम्मान परिवार सहित लंदन-वंदन की ओर निकल सकें।

प्रस्ताव में उम्मीद जताई गई कि बैंकों में घोटालों के सामने आने की अभी तो केवल शुरुआत है। आने वाले वक्त में और भी कई घोटाले उजागर होंगे। और भी कई बिजनेसमैन घोटालों के बाद भारत से बाहर भागेंगे। तो ऐसे में घोटालों में मदद करने वाले बैंकर्स भी समय के साथ चल सकें, इसकी जिम्मेदारी स्वयं बैंकर्स के साथ-साथ सरकार और पूरे समाज की भी है।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल हास्य-व्यंग्य करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)