अब समझ में आया, ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ का असली अर्थ, देश ने ली राहत की सांस

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हिंदी सटायर डेस्क। आखिर 4 साल के बाद देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोगन ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ का असली मतलब समझ में आ गया। इससे पूरे देश ने, खासकर भाजपाइयों ने राहत की सांस ली।

गुरुवार को दिनभर भाजपाइयों को एक टाइम भूखा रहना पड़ा। विपक्ष द्वारा संसद का कामकाज बाधित करने के विरोधस्वरूप भाजपा हाईकमान ने उपवास की घोषणा की थी। इसमें मोदी सहित देशभर के लाखों भाजपाई उपवास पर बैठे। एक भाजपा नेता ने भूख के कारण पेट में उठ रही मरोड़ को दबाते हुए कहा, “अब समझ में आया न खाऊंगा, न खाने दूंगा का असली अर्थ। स्साला, चार साल से हम जबरदस्ती परेशान हो रहे थे। मोदीजी पहले ही बता देते तो इतना नुकसान तो नहीं उठाना पड़ता।”

देश भर में मलाईदार पदों पर बैठे लाखों सरकारी कर्मचारियों, ठेकेदारों और समकक्ष लोगों ने भी नारे के असली अर्थ का खुलासा होने पर प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया है।

कांग्रेसियों पर भी उतारा गुस्सा…

कुछ भाजपाई तो संसद का कामकाज बाधित होने से भी ज्यादा इस वजह से कांग्रेस नेताओं पर नाराज थे कि उन्होंने भटूरे खाते समय सावधानी क्यों नहीं बरती। दरअसल, कांग्रेसियों के उपवास के दौरान छोटे-भटूरे खाते फोटो वायरल होने के कारण भाजपाइयों को अघोषित निर्देश दिए गए थे कि वे बाहर ऐसी किसी भी हरकत में शामिल न हों, ताकि पार्टी को नीचा न देखना पड़े।

इस पर एक भाजपाई ने गुस्से में कहा, “स्साले कांग्रेसियों का बेड़ा गर्क हो। भटूरे चेंपे तो चेंपे, कम से कम इतनी सावधानी तो रख लेते कि फोटो नहीं आए। हमारे लिए समस्या खड़ी कर दी। घर पर बीवी ने भी यह कहकर कुछ भी खाना देने से मना कर दिया कि आज तो आपका उपवास है। अब बाहर खा नहीं सकते। पूरा दिन बर्बाद हो गया।”

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)