Classics

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नागपंचमी पर क्लासिक कविता – चंदन चाचा के बाड़े में

 सुधीर त्यागीसूरज के आते भोर हुआ लाठी लेझिम का शोर हुआ यह नागपंचमी झम्मक-झम यह ढोल-ढमाका ढम्मक-ढम मल्लों की जब टोली निकली। यह चर्चा फैली गली-गली दंगल हो रहा...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक हिंदी व्यंग्य ‘भारतीय राजनीति का बुलडोजर’

हरिशंकर परसाई राजनीति में बुलडोजर बहुत काम की चीज है। किसी को भी तोड़ना-फोड़ना हो तो बुलडोजर ही काम आता है। हर युग में यह...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य – किस्सा मुहकमा तालीमात

हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई (harishankar parsai) ने करीब 45 साल पहले यह व्यंग्य लिखा था। यह शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष था। इसके कुछ हिस्से आज...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘बकरी पौधा चर गई’

हरिशंकर परसाई (Harishankar Parsai) साधो, तुम सुनते आ रहे हो कि बागड़ खेत को खा ही गई और नाव नदी को ही लील गई और...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘ईश्वर की सरकार’

हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई (harishankar-parsai) ने यह व्यंग्य तब की जनता सरकार पर लिखा था। लेकिन इस व्यंग्य में किसी भी सरकार को फिट कर...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘नया खून – पुराना खून’

सन् 1962 के आम चुनावों के लिए पार्टी टिकटों की कोशिशें चल रही थीं। कांग्रेस में मांग उठ रही थी कि संसद, विधानसभाओं और...
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काका हाथरसी की हास्य-व्यंग्य कविता ‘सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा’

हिंदी सटायर डेस्क। हिंदी के जाने-माने हास्य-व्यंग्य कवि काका हाथरसी (kaka hathrasi) ने आज से सालों पहले 'सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा'...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक हास्य-व्यंग्य ‘निंदा रस’

हरिशंकर परसाई  ‘क’ कई महीने बाद आए थे। सुबह चाय पीकर अखबार देख रहा था कि वे तूफान की तरह कमरे में घुसे, साइक्लोन जैसा...
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हरिवंशराय बच्चन की यह कविता बदल देगी आपकी सोच

सटायर डेस्क। 27 नवंबर यानी आज हरिवंशराय बच्चन का जन्म दिन है। इसी मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप यह कविता पेश है : वृक्ष हों...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य निर्भय दर्शन

हरिशंकर परसाई  गालिब को भी नींद रात-भर नहीं आती थी। मुझे भी नहीं आती। गालिब परेशान थे कि जब मौत का एक दिन मुअय्यन है, तो...