500 में से 500 नंबर नहीं आने से CBSE चिंतित, स्कूलों में शुरू करेगा Short Term PhD

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By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। सीबीएसई (CBSE) की दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की बोर्ड एग्जाम में एक भी स्टूडेंट के 500 में से 500 नंबर नहीं आने से चिंतित बोर्ड ने स्कूलों में शार्ट टर्म PhD कोर्स शुरू करने का फैसला किया है।

CBSE के एक उच्च स्तरीय सूत्र ने बताया, इस बार बारहवीं और दसवीं के रिजल्ट्स बहुत ही निराशाजनक रहे हैं। बारहवीं में केवल दो स्टूडेंट 500 में से 499 और दसवीं में 13 स्टूडेंट ही 499 मार्क्स ला पाए। इससे चिंतित केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एक कमेटी बनाकर कारणों की जांच-पड़ताल करने के निर्देश दिए थे। मंत्री के निर्देश पर बनी कमेटी ने रिपोर्ट सबमिट कर दी है।

क्या है रिपोर्ट में?

रिपोर्ट के अनुसार इस निराशाजनक प्रदर्शन की वजह बच्चों द्वारा पढ़ाई को कम समय देना है। कुछ बच्चे अब भी स्कूलों से लौटने के बाद खेल मैदान में दिखाई देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार भले ही बच्चा आधा घंटा ही खेलें, लेकिन इसका परफॉर्मेंस पर काफी निगेटिव असर पड़ता है। कमेटी ने बच्चों की इस खेलने-कूदने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए ही शार्ट टर्म PhD कोर्स शुरू करने का प्रपोजल दिया है जिसे सीबीएसई ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।

सूत्र के अनुसार, पढ़ाई के मामले में हम एक मिनट भी विलंब नहीं कर सकते। ये शार्ट टर्म PhD कोर्स गर्मियों की बची हुई छुट्टियों से ही शुरू करवाए जाएंगे। स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि जो बच्चे अपनी नानी या दादा-दादी के यहां गए हैं, उन्हें भी तुरंत स्कूलों में बुलाकर प्रोसेस शुरू कर दी जाए। जिन बच्चों ने गर्मियों का होमवर्क नहीं किया है, उन्हें भी होमवर्क के साथ ही PhD करनी होगी।

(Disclaimer : यह खबर कपोल कल्पित है। इसका मकसद केवल सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)