क्या यह शरद पवार की हार है? ज्यादा सोचिए मत, बस पढ़ लीजिए…

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(Disclaimer : यह देर से लिखा लेकिन देश का सबसे सच्चा एनालिसिस है। हालांकि यह उतना ही फेक साबित हो सकता है, जितने कि फेक बाकी हुए…)

Jayjeet, हिंदी सटायर डेस्क। 

हेडिंग पढ़कर सोच में पड़ गए? तो समझ लीजिए कि आप सही पीस पढ़ रहे हैं। तो बगैर टाइम खोटी किए दो जानी-पहचानी बातों पर विचार करते हैं फटाफट :

पहली, अगर पवार चाणक्य हैं, जैसा कि उनके नए-पुराने समर्थक कूट-कूटकर दावा कर रहे हैं, तो सच्ची बताइए, अगर सुबह अजित पवार राजभवन पहुंचते हैं और वह भी एनसीपी के कुछ विधायकों के साथ तो क्या शरद बाबू को यह पता नहीं चला होगा? आखिर शरद पवार सोनिया गांधी तो हैं नहीं कि सोते रहे होंगे। और अगर आपको लगता है कि शरद पवार सो रहे थे, तो आपकी मासूमियत को प्रणाम।

दूसरी बात, भले ही भाजपा अपनी राज्य इकाइयों को थोड़ी बहुत मनमानी करने की छूट देती है, लेकिन क्या इस पूरे मामले से अमित शाह अलग रहे होंगे और वह भी महाराष्ट्र जैसे इतने अहम राज्य में? तो अमित शाह केवल अजित पवार के भरोसे ही इतना बड़ा कदम उठा लेंगे? अगर आपको यह भी लगता है तो आपकी मासूमियत को डबल प्रणाम।

खैर, अब असली सवाल पर आते हैं : ऐसा क्या हुआ कि महज 40 घंटे में ही सरकार गिर गई? अजित पवार को लौटना पड़ा ? नेशन वांट्स टू नो…। लेकिन, अफसोस देश को कभी भी इस बात का पता नहीं चल पाएगा कि दो महान चाणक्यों के बीच आखिर डिल क्यों टूट गई? यह बात सब जानते हैं कि शरद पवार ईडी के मामले में फंसे हैं और ईडी अमित शाह के चंगुल में फंसा है। तो क्या शरद पवार महाराष्ट्र की ब्लैकमेलिंग से ऐसी कोई डील चाहते थे जो उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए ईडी की पकड़ से मुक्त कर सके? और अमित शाह शायद भविष्य के इस संभावित महाबलि को कहीं न कहीं अटकाना चाहते थे? शायद यहीं कहीं इन चाणक्यों के बीच ‘मगध’ टकराया होगा। और फिर बनती बात बिगड़ती चली गई होगी।

और जब बात न बनी तो पवार ने सोचा होगा कि चलो, जो सरकार बन रही है, वही बना लें। अजित पवार को लौटने के संकेत दिए गए होंगे। और अजित पवार चुपचाप लौट आए…बुद्धु बनकर। और सब इतने सिस्टेमैटिक ड्रामे के रूप में हुआ कि हर चीज वास्तविक लगे….। और पवार बना दिए गए पॉवर गेम के उस्ताद!!!

तो पवार भले ही ऊपर से पॉवर गेम में विक्टरी टाइप का निशान दिखाए, पर अंदर से वे जानते हैं कि हार उनके हिस्से में भी आई है, बल्कि ज्यादा आई है।

क्योंकि ईडी तो अमित शाह के इशारों पर नाचने को और भी बेकरार हो उठा है….। बशर्ते, कोई नई डील न हो…!!

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