स्वच्छता अभियान के चक्कर में एक पौधे की अकाल मौत, राजनीति भी शुरू

clean-campaign , modi Clean-campaign , marigold plant dried, सूख गया पौधा, स्वच्छता अभियान, मोदी का स्वच्छता अभियान, हिंदी जोक्स

हिंदी सटायर डेस्क, इंदौर। यहां के एक सरकारी हॉस्पिटल के गमले में लगे पौधे के सूखकर मरने की खबर है। इस मासूम पौधे की अकाल मृत्यु के लिए विपक्ष ने मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान (clean-campaign) को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, हाॅस्पिटल प्रशासन ने मामले को दबाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

पाैधे के पड़ोस में रहने वाले मनी प्लांट ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, “एक महीने पहले ही गमले में गेंदूमल रहने को आए थे। हॉस्पिटल के लोगों ने उसे तीन-चार दिन तो पानी-वानी पिलाया। फिर उसे लोगों की पीक के भरोसे छोड़ दिया। लेकिन शहर के लोगों ने जाने-अनजाने में मोदीजी के स्वच्छता अभियान को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया। इस कारण जबसे यह पौधा लगा, तब से उसे एक बार भी पीक नसीब नहीं हुई। बेचारा एक अदद पीक लिए तरस गया। और देखते-देखते सूखकर भगवान को प्यारा गया।”

हॉस्पिटल प्रशासन की बचकानी सफाई :

गेंदूमल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके सूखकर मरने की वजह पर्याप्त पीक नहीं मिलना पाया गया है। हालांकि हॉस्पिटल प्रशासन ने इस मामले में कहा है कि हॉस्पिटल के कोने-कोने में पीक ही पीक भरी हुई है। ऐसे में उसे पीक नहीं मिलने का कोई उचित कारण प्रतीत नहीं होता। हो सकता है पौधा इतने डीप कोने में रखा गया हो कि लोगों की नजर ही नहीं पड़ी हो। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं कि अगर वाकई पौधे की मौत पीक न मिलने से हुई हो, तो उसे ऐसी जगह पर किसने रखा जहां हमारे पीकबाजों की नजर न गई हो। हम ऐसे दोषी कर्मचारी की पहचान कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।

विपक्ष ने लिया आड़े हाथ :

विपक्ष ने पौधे की मौत को सीरियसली लेते हुए इसके लिए मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। बसपा ने कहा कि गेंदूमल की मौत से दलितों के प्रति भाजपा की संवेदनहीनता फिर उजागर हो गई। गुलाब या ऊंची जाति के पौधों की मौत की खबर क्यों नहीं आती? स्वच्छता अभियान में केवल दलित टाइप के पौधों को ही टारगेट किया जा रहा है।

वहीं कांग्रेस ने कहा कि हमारे 60 साल के शासनकाल में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई पौधा पीक नहीं मिलने से मर जाए। रोटी नहीं मिलने से भले ही लोग मरे हो, लेकिन पौधों को कभी भी मरने नहीं दिया। यह भाजपा सरकारों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

भाजपा का पलटवार :

विपक्ष के इस आरोप पर सांबित पात्रा के प्रवक्ता ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस 60 साल का हिसाब दे, फिर हम पर कोई आरोप लगाए। यह पूछे जाने पर कि 60 साल का हिसाब कब तक मांगते रहोगे? सांबित पात्रा के प्रवक्ता ने कहा, “जब तक कि हमें सत्ता में आए 60 साल न हो जाएं, तब तक।”

(Disclaimer : यह खबर कपोल कल्पित है। इसका मकसद केवल सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)