सरकार और यमराज में क्या समानता है? जानिए यहां

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हिंदी सटायर डेस्क। सरकार और यमराज में क्या समानता है? दोनों हादसों का इंतजार करते हैं। हादसे के बाद यमराज सर अपनी नौकरी करते हैं और सरकार नए आदेश निकालती है।

ताजा मामला मप्र के इंदौर का है। वहां एक हादसे ने चार मासूमों की जिंदगी छीन ली, चार परिवार उजाड़ दिए। इसके बाद यमराज ने भीगी आंखों से अपना दायित्व पूरा किया। अब सरकार बेशर्मी से अपना दायित्व पूरा कर रही है। हादसे के बाद राज्य के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर शैलेंद्र श्रीवास्ताव ने कहा है – प्रदेश की स्कूलों में अब 15 साल से पुरानी बसें नहीं चलेंगी। यहां ‘अब’ बड़ा महत्वपूर्ण है। इस ‘अब’ के लिए यमराज का इंतजार किया गया। यह ‘अब’ भी ‘कब’ अमल में आएगा, यह बड़ा सवाल है और जो शायद सवाल ही बना रहेगा।

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर है तो हमें मानकर चलना चाहिए कि उन्हें अपने महकमे के बारे में सबकुछ पता होगा। (अगर नहीं है तो उन्हें बेनिफिट ऑफ डाउट देने के बजाय आउट करना चाहिए।) इसलिए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को यह भी पता जरूर होगा कि उनका विभाग भ्रष्टाचार के मामले में कितना प्रतिष्ठित है। तो ऐसे में आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस आदेश के बाद भी कई स्कूलों में 15 साल पुरानी गाड़ियां भी चलती रहेंगी। क्योंकि संवेदनाएं, चाहे स्कूलों की हो या सरकार की, केवल हादसे के बाद ही जागती हैं। फिर सोने चली जाती हैं।