हे नाथ! (No कमलनाथ), अब मेरे पासवर्ड की रक्षा तेरे ही हाथ!!

electricity , electricity site of MP,SSL Certificate, what is SSL Certificate, मप्र बिजली विभाग, हिंदी व्यंग्य
असुरक्षा का पूरा भरोसा!!
क्योंकि बिजली विभाग के अनपढ़ अफसरों को पता ही नहीं कि बिजली विभाग की साइट को सुरक्षित कैसे बनाना है…!

By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। अगर आप मप्र में रहते हैं और बिजली का बिल ऑनलाइन भरते हैं तो बिल भरने से पहले असली वाले भगवान को जरूर याद कर लीजिए। ऐसा इसलिए क्योंकि भले ही सरकार बदल गई हो, लेकिन मप्र बिजली विभाग की वेबसाइट के सेक्युरिटी फीचर्स नहीं। कमलनाथ के राज में भी यह उतनी ही असुरक्षित है, जितनी कि पहले कमलराज में थी। इसलिए इस साइट पर न बिजली बिल के लिए भरी राशि सुरक्षित है और न ही आपके क्रेडिट-डेबिट कार्ड का डेटा।

मप्र बिजली विभाग की साइट (मध्य क्षेत्र) http://www.mpcz.co.in पर जैसे ही आप जाते हैं, तो उसके URL की पट्‌टी पर आपको एक्स्प्लेनेशन (!) का चिह्न मिलेगा। इसके बाजू पर अंग्रेजी में लिखा मिलेगा – Not Secure…। अगर आपको अब भी भरोसा नहीं है तो इस एक्स्प्लेनेशन चिह्न पर क्लिक कीजिए। आपको और भी डराने वाली लाइनें मिलेंगी – Your Connection to this site is not secure यानी इस साइट पर आपका कनेक्शन सुरक्षित नहीं है। ठहरिए, नीचे और लाइनें पढ़िए : इस साइट पर आप अपनी कोई भी सेंसेटिव सूचना मसलन पासवर्ड या क्रेडिड कार्ड नहीं डालें क्योंकि यह अटैकर्स द्वारा चुराई जा सकती है (देखें तस्वीर)। यानी साइट सुरक्षित नहीं है, इस पर आपका डेटा सुरक्षित नही है, यह पक्का भरोसा दिलाने वाली लाइनें… पहले शिव सरकार के अफसर यह भरोसा दिलाते थे, अब नाथ सरकार के।

और केवल मध्य क्षेत्र ही नहीं, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के भी यही हाल है। डेटा चुराए जाने की एकसमान गारंटी!!

तो क्या कर सकते हैं?

हम कुछ नहीं कर सकते, बस ऑनलाइन मिलने वाली इस आसान-सी प्रोसेस के सुरक्षित न होने पर बिजली विभाग के अनपढ़ टाइप के आला अफसरों को लानतें भेजने के। करना तो बिजली विभाग के इन अफसरों को ही है। चूंकि ये अफसर हैं ही अनपढ़ टाइप के, तो हम बताए देते हैं कि उन्हें करना क्या है। आर्थिक लेनदेन करने वाली सभी साइटों के लिए SSL Certificate लेना जरूरी है। इसका फुल फॉर्म है – Secure Sockets Layer जो यूजर के क्रेडिट-डेबिट कार्ड डेटा को इंक्रिप्ट कर पूरी सुरक्षा देता है। इसके लिए साल में कुछेक हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। जिन साइट के पास यह सर्टिफिकेट होता है, उनके यूआरएल पर एक ताले का निशान रहता है। या यूआरएल की शुरुआत https:// से होती है। तमाम बैंकों की ऑनलाइन साइट्स के यूआरएल पर ताले का यह निशान या https देख सकते हैं। हां, उन साइट के लिए यह सर्टिफिकेट लेना जरूरी नहीं है जो केवल कंटेंट पर काम करती हैं, जैसे hindisatire.com, हालांकि बड़े ग्रुप तो ले ही लेते हैं। कुछेक हजार तो लगते हैं।

तो जब तक बिजली विभाग के अनपढ़ अफसरों को अकल नहीं आती, तब तक भगवान पर भरोसा बनाए रखिए, क्योंकि अब बिजली विभाग के दफ्तर में जाकर तो बिल भरने से हम रहे…हे नाथ!!!

नीचे दी गई तस्वीर काफी है….

 

(Disclaimer : यह खबर तथ्यों पर आधारित है। हालांकि अंदाज सटायरिकल है।)