आरती वित्तमंत्री जी की : काका हाथरसी

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जय वित्ती चाचा, ओम् जय वित्ती चाचा
इत्ते लादे टैक्स, हमारा बदल गया ढांचा
ओम् जय वित्ती चाचा…।

पहले ही थे त्रस्त, वस्त्र अब और हुए महंगे
कैसे दें घरवाली को साड़ी, ब्लाउज, लहंगे
ओम् जय वित्ती चाचा…।

साबुन औ’ सिगरेट उछलकर चढ़े चार सीढ़ी
सिगरेटी बाबू बेचारे, सूंत रहे बीड़ी
ओम् जय वित्ती चाचा…।

पैट्रोल मंथन कर, ‘कर’ कितने करोड़ झाड़ा
हुआ सवाया टैक्सी, बस, स्कूटर का भाड़ा
ओम् जय वित्ती चाचा…।

तुम सरकारी छुरा प्रभो! हम हैं बलि के बकरा
देख आपका ‘आर्ट’ दंडवत् करें जेबकतरा
ओम् जय वित्ती चाचा…।

तुम ही नेता, तुमहि प्रणेता, तुम ही प्रजापति
वोट दिए पछताया तुमको मैं वोटर कुमती
ओम् जय वित्ती चाचा…।

‘करें गरीबी दूर’ दिलासा देकर बहलाए
दिन-दिन दीन-गरीब, करीब गरीबी के आए
ओम् जय वित्ती चाचा…।

महंगाई बढ़ गई, पड़ा क्या जनता के पल्ले
वाह-वाह कर रहे, आपके चमचे-दुमछल्ले
ओम् जय वित्ती चाचा…।

देख आपका बजट, गृहस्थी हाहाकार करे
नहीं सुरा पर टैक्स, पियक्कड़ जै जै कार करे
ओम् जय वित्ती चाचा…।

श्री वित्ती चाचा की आरती जो कोई गावे
मृत्यु बाद में होय, मृत्यु कर पहले लग जावे
ओम् जय वित्ती चाचा…।

  • काका हाथरसी, हास्य कवि

    (Courtesy : काका के व्यंग्य-बाण, डायमंड बुक्स)