जाति विवाद में हनुमानजी भी कूदे, कहा- जातिगत समीकरण पक्ष में हों तो लड़ सकते हैं चुनाव

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By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। हनुमानजी की जाति (hanuman-caste) को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब खुद हनुमान भी कूद गए हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगर जातिगत समीकरण उनके पक्ष में होते हैं तो वे आगामी लाेकसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं।

हनुमानजी ने ये संकेत यहां शनिवार सुबह एक खचाखच भरी प्रेस वार्ता में दिए। शुरुआत दार्शनिक अंदाज में की, “अभी तक मुझे लगता था कि केवल रामभक्त होना ही काफी रहेगा। लेकिन अब समझ में आ गया है कि जाति की हम उपेक्षा नहीं कर सकते। भारतीय समाज में, खासकर राजनीति में इसका खासा महत्व है।”

इसके बाद अपनी दबी हुई राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को उजागर करते हुए कहा, “वैसे तो मैं प्रभु राम की सेवा से ही खुश हूं, लेकिन अगर जनता मुझे सेवा करने का मौका देती है तो मैं एक बार के लिए सोच सकता हूं।”

यह पूछे जाने पर कि वे कहां से चुनाव लड़ना चाहेंगे, इसका गोलमोल जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “पहले तो यह तय हो जाए कि मेरी जाति क्या है? जाति तय होने के बाद सारे राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर ही मैं तय करुंगा कि मुझे सपा से लड़ना है या बसपा से या आरएलडी से।”

यह पूछे जाने पर कि क्या बीजेपी में उन्हें संभावना नजर नहीं आती, भोले हनुमानजी ने कहा, “बीजेपी अब भी भगवान राम के भरोसे चुनाव जीतना चाहती है। अब मैं तो खुद रामजी की खास मंडली का सदस्य हूं और मुझसे ज्यादा भला उन्हें कौन जानेगा? भगवान ने खुद संकेत दिए हैं कि अब मेरे भरोसे मत बैठना। तो अब खुद प्रभु ने बोल दिया है तो वहां जाकर क्या करना?”

इस बीच, हनुमानजी के विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि उन्होंने नील और अंगद के नेतृत्व में एक समिति भी गठित कर दी है जो देशभर में लोकसभावार जातिगत आंकड़े जुटाएगी। उम्मीद है कि हनुमानजी इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही अपने पत्ते खोलेंगे।

(Disclaimer : यह एक राजनीतिक व्यंग्य है। मकसद केवल मौजूदा राजनीतिक हालात पर कटाक्ष करना है, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं।)