#इब्नबतूता की आत्मा रिटर्न्स 12 : लॉकडाउन के बीच मास्क की तलाश में आत्मा-ए-इब्नबतूता

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By jayjeet

कोरोनावायरस .. यह शब्द पिछले कुछ दिनों से इब्नबतूता की आत्मा इतनी बार सुन चुकी है कि आत्मा होकर भी उस पर डर हावी हो गया है। इसी डर का यह नतीजा था कि इब्नबतूता की आत्मा ने फौरन वापस उस लोक लौटने का फैसला कर लिया जहां से वह आई थी। लेकिन वहां से उसे साफ कह दिया गया – ‘आप अभी जहां हैं, वहीं रहें। यह न केवल आपके लिए अच्छा है, बल्कि परलोक में रहने वाले तमाम बाशिंदों के लिए भी। अभी परलोक संक्रमण से बचा हुआ है। कृपया धरती से अपना संक्रमण यहां मत लाइए।’

अब आत्मा करती क्या न, मरती क्या? खुद को लॉकडाउन करने के अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था। पर लॉकडाउन करने से पहले उसने खुद को और भी सुरक्षित करने के लिए कुछ साधन जुटाने का फैसला किया। तो सबसे पहले वह सीधे मेडिकल शॉप पर पहुंची और केमिस्ट से मास्क मांगा। चूंकि आत्मा ने खुद के हुलिए को एक आम हिंदुस्तानी में बदल लिया था, एक बाबानुमा हुलिया। इसलिए उस केमिस्ट ने उस पर शक नहीं किया। अंदर से एक घटिया-सा मास्क लाकर आत्मा के हाथ में रख दिया। आत्मा ने बहुत ही सकुचाते हुए उसे 20 रुपए का नोट पकड़ा दिया। वह तुरंत वहां से निकलना चाहती थी क्योंकि उसे डर था कि मेडिकल शॉप का वह युवा केमिस्ट उसे जबरदस्ती रुपए लौटाकर कहीं यह न कह दें- ‘बाबा, क्यों शर्मिंदा करते हो। आप तो ऐसे ही ले जाइए। हम बाद में भी कमा लेंगे।’
और वही हुआ, जिसका डर था। केमिस्ट ने जाती हुई आत्मा को रोक लिया, ‘बाबा ये क्या? 20 रुपए?’

‘हां, बेटा रख लें। मुझे मुफ्त की चीज पसंद नहीं। चैरिटी कहीं और कर देना… ’

चौंकने की बारी उस युवा केमिस्ट की थी। आत्मा की बात उसे कुछ समझ में नहीं आई, ‘बाबा, 20 रुपए में तो अब मास्क के दर्शन भी नहीं होते। 180 और दीजिए। पूरा 200 का है…।’

आत्मा नि:शब्द रह गई। बड़ी मुश्किल से मुंह से कुछ शब्द फूटे, ‘5 रुपए की चीज के 200? बहुत ज्यादती नहीं है ये क्या?’

‘तो हम यहां क्या चैरिटी के लिए बैठे हैं? और अभी नहीं कमाएंगे तो कब कमाएंगे?’ केमिस्ट बोला।

इब्नबतूता की आत्मा के दिल में एक बार तो आया कि अपनी दैवीय शक्ति का इस्तेमाल कर इसे अपने उलटे पैर दिखा दें, दिन में तारे नज़र आ जाएंगे। लेकिन फिर यह सोचकर पीछे हट गई कि ऐसा करते ही न्यूज चैनल वाले कोरोनावायरस को छोड़कर ‘मास्क वाले भूत’ के पीछे पड़ जाएंगे। ब्रेकिंग न्यूज चलाएंगे कि देखिए कैसे एक भूत एक मेडिकल शॉप पर मास्क लेने आया। इससे देश में जबरन अफरा-तफरी मच जाएगी और कोरोनावायरस का असली मुद्दा पीछे छूट जाएगा।

फिर एक यह भी विचार आया कि मैं क्यों मास्क पहनूं? मुझ पर क्या असर पड़ेगा? मैं क्यों इतना परेशान हो रही हूं? मेरे कारण अगर किसी को कोरोना हो तो उसकी बला से। यही सोचकर उसने गुस्से में मास्क वहीं पटक दिया और आगे निकल गई। मेडिकल शॉप वाला भुनभुनाते रह गया कि न जाने कहां-कहां से आ जाते हैं। सबको खैरात में चाहिए।

लेकिन आत्मा के पैर ज्यादा दूर तक कदम नहीं बढ़ा पाए। एक नया विचार उसके दिमाग में कौंध गया, ‘भले ही मेरी पैदाइश मोरक्को की हो, पर नमक तो इस मिट्‌टी का ही खाया है। क्या हुआ जो मैं थाली न बजा पाई, क्या हुआ जो मैं तिरंगा लेकर सड़कों पर घूम न पाई, क्या हुआ जो मैं भारत मां की जय-जयकार न कर पाई। पर फिर भी मैं कोरोना का वाहक बनकर इस धरती के साथ गद्दारी नहीं कर सकती। केमिस्टवाले का ईमान केमिस्ट वाला जानें। देगा जवाब जब वह ऊपर जाएगा। लेकिन मुझे तो जल्दी ही वापस परलोक लौटना है। तब ईश्वर को मैं क्या जवाब दूंगी? नहीं, मैं खुद को असुरक्षित कर दूसरों को असुरक्षित नहीं कर सकती। मैं तो एक जिंदगी जी चुकी हूं, पर करोड़ों लोगों के सामने लंबा भविष्य है… ।’

और आत्मा ने वापस मेडिकल स्टोर की तरफ कदम बढ़ा लिए, ताकि जल्दी ही मास्क लेकर वह खुद को लॉकडाउन कर सकें।

(जयजीत ख़बरी व्यंग्यकार और ब्लॉग ‘हिंदी सटायर डॉट कॉम’ के संचालक हैं। )