खटमल-मच्छर युद्ध (काका हाथरसी)

‘काका’ वेटिंग रूम में फंसे देहरादून।
नींद न आई रात भर, मच्छर चूसे खून॥
मच्छर चूसे खून, देह घायल कर डाली।
हमें उड़ा ले ज़ाने की योजना बना डाली॥
किंतु बच गए कैसे, यह बतलाए तुमको ।
नीचे खटमल जी ने पकड़ रखा था हमको ॥

हुई विकट रस्साकशी, थके नहीं रणधीर।
ऊपर मच्छर खींचते नीचे खटमल वीर॥
नीचे खटमल वीर, जान संकट में आई।
घिघियाए हम- “जै जै जै हनुमान गुसाईं॥
पंजाबी सरदार एक बोला चिल्लाके –
त्व्हाणूँ पजन करना होवे तो करो बाहर जाके॥

– काका हाथरसी, हास्य कवि