काका हाथरसी की हास्य कविता ‘सावधान’

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नेताजी जब आपसे, स्वयं मिलाए हाथ
समझो गहरा राज है, भैया भोलानाथ
भैया भोलानाथ, दाल में कुछ काला है
भला-बुरा कुछ-न-कुछ, आज होने वाला है
हाथ छुड़ाकर सर्वप्रथम, यह काम कीजिए
पांचों उंगली सही-सलामत, देख लीजिए…

  • काका हाथरसी, हास्य कवि

(Courtesy : काका के व्यंग्यबाण, डायमंड बुक्स)