Knowledge : कैसे पता चलता है कि देश में मानसून आ गया है?

लंबे इंतजार के बाद अंतत: मानसून (monsoon) ने केरल में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने भी मानसून के भारत पहुंचने का एलान कर दिया है। सवाल यह है कि मानसून भारत पहुंच गया है, इसका क्या क्राइटेरिया रहता है? मौसम विभाग किन आधारों पर मानसून के पहुंचने का एलान करता है? इस वीडियो में इसी की पड़ताल….

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यहां टैक्स्ट में पढ़ें यह नॉलेज न्यूज… 

हिंदी सटायर डेस्क। जून आते-आते ऐसी खबरें भी अक्सर पढ़ने को मिलने लगती हैं कि देश में मॉनसून (monsoon) ने दस्तक दे दी है या देने वाला है…भारत में मानसून सबसे पहले केरल में आता है और जब केरल के तटीय इलाकों में यह पहुंचता है तो कहा जाता है कि देश में मानसून आ गया है। लेकिन सवाल यह है कि केरल में भी मानसून आ गया है, यह कैसे पता करते हैं?

इसके लिए तीन पैरामीटर होते हैं।
1. बारिश : भारतीय मौसम विभाग ने तटीय इलाकों में 14 लोकेशन तय कर रखी हैं। इनमें 11 केरल (तिरुवनंतपुरुम, पुनलुर, कोल्लम, अलप्पूझा, कोट्यम, त्रिशूर, कोचि, कोझीकोड, थियासरी, कन्नुर और कुडूलू ), 2 लक्षद्वीप (मिनी कॉय और अमिनी दिवी) में और एक कर्नाटक (मेंगलौर) में हैं। इन 14 लोकेशनों के 60 फीसदी या अधिक लोकेशनों पर (यानी कम से 9 लोकेशनों) पर लगातार दो दिन तक कम से कम 2.5 ML बारिश होनी चाहिए।

2. हवा : इन क्षेत्रों में हवा दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहने लगे और उसकी गति 25 से 30 किमी प्रति घंटे की होनी चाहिए।

3. रेडिएशन : मौसम की भाषा में इसे OLR यानी आउटगोइंग लांगवेव रेडिएशन कहते हैं। इसकी मात्रा इन स्पेसिफिक लोकेशन में 200 वॉट स्क्वेअर मीटर से कम होनी चाहिए। इसका मतलब यह होता है कि जमीन के ऊपर बादल बनने शुरू हो गए हैं।

मैं कैसे जान सकता हूं कि मेरे शहर में मानसून आ गया है?
मौसम विभाग दो तरीके से monsoon की भविष्यवाणी करता है। एक, अप्रैल में जब केवल अंदाजा लगाया जाता है कि इस साल मानसून कैसा रहेगा। दूसरा, जून मध्य में। इसमें रिजनवाइस मानसून की भविष्यवाणी की जाती है। इससे यह लगभग तय होता है कि किस रिजन में या किस शहर में मानसून कब पहुंचेगा। उस निर्धारित तारीख के आसपास जब हवा में नमी आने लगे, शहर या आसपास के 6 से 7 लोकेशन में दो से तीन दिन तक बारिश हो तो फिर स्थानीय अधिकारी मानसून की घोषणा करते हैं।

मेरे शहर में टाइम पर मानसून आएगा ही, इसकी क्या गारंटी है?
monsoon पूरी तरह हवाओं की गति और दिशा पर निर्भर करता है। हवाओं की सटीक भविष्यवाणी करना तो सबसे टफ जॉब होता है। कई बार लोकल डिस्टरबेंस के कारण हवाओं की दिशा बदल जाती है, जिससे मानसून ब्रेक हो जाता है और निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पाता।

गर्मी बहुत पड़ रही है? क्या यह मानसून के लिए अच्छा है?
ज्यादा गर्मी यानी ज्यादा बारिश। जब सतह ज्यादा गर्म होती है तो समुद्रों की ओर से आने वाली मानसूनी हवाओं की मात्रा बढ़ जाती है। वे अधिक पानी लेकर आती हैं।

कैसे पहचानें कि अब मानसून खत्म होने का समय आ गया है?
पूरा खेल हवाओं का होता है। हवाओं की गति जब दक्षिणी-पश्चिमी होती है तो मानसून की शुरुआत होती है। जब हवाओं की गति बदलकर उत्तर-पूर्व हो जाती है तो यह मानसून के खत्म होने का संकेत होता है। हवाओं में बदलाव को मौसम वैज्ञानिक ही समझ सकते हैं, लेकिन आम लोगों के लिए सबसे बड़ा संकेत यह होता है कि वातावरण में नमी कम होने लगती है।