कुमार विश्वास ने ‘कोई दीवाना कहता है…’ से अलग हटकर पढ़ी दूसरी कविता, 3 लोग कोमा में

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'साहित्य परसोतक' में नई कविता फेंकते कवि कुमार विश्वास...

नई दिल्ली। जाने-माने कवि कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) ने ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है…’ की जगह एक अलग कविता सुनाकर उन्हें सुनने आए हजारों श्रोताओं को शॉक्ड कर दिया। कई लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा है। इनमें से तीन लोग कोमा में बताए जा रहे हैं।

कुमार विश्वास यहां शनिवार की शाम को साहित्य परसोतक (आजतक का नेक्स्ट लेवल) में शिरकत कर रहे थे। वे जैसे ही उठे, लोगों ने पहले ही गाना शुरू कर दिया – ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है …’ लेकिन कुमार विश्वास तो घर से ही यह तय करके आए थे कि आज दो-चार को हॉस्पिटल पहुंचाना ही है। इसलिए उन्होंने कोई दूसरी ही कविता सुना दी। इसको सुनते ही सारे श्रोता अवॉक रह गए। किसी के मुंह से आवाज तक नहीं फूट रही थी।

एक श्रोता ने किसी तरह हिम्मत करके hindisatire से कहा – मैंने कानों को दो बार हल्के से झटका। कंफर्म किया कि कान सही-सलामत तो हैं। फिर साथ लाई पानी की पूरी बोतल सिर पर उड़ेल दी। हां, मैं जागा हुआ था। जागकर भी इतना शॉक्ड इससे पहले कभी नहीं हुआ था। फिर मैंने देखा कि बाजू वाले तीन श्रोता जमीन पर गिरे हुए थे। हालांकि उनकी सांसें चल रही थीं। आसपास नजर दौड़ाई तो सैकड़ों श्रोता बदहवाश थे। इस बीच, इमरजेंसी सेवाएं वाले भी आ गए। कई लोगों को उन्होंने तुरंत हॉस्पिटल पहुंचाया। इनमें से तीन की हालत सीरियस बताई जा रही है।

उधर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोजकों ने कुमार विश्वास ने तुरंत ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है’ की चंद पंक्तियां सुनाने की रिक्वेस्ट की। इस पर कुमार ने जब ये लाइनें सुनाई तो कुछ लोगों की जान पर जान आई।

ऐसा क्यों हुआ?

दरअसल, कुमार विश्वास पिछली एक सदी से ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है’ सुनाते आ रहे हैं। उनकी प्लानिंग तो इक्कीसवीं सदी में भी इसी कविता को ही कंटीन्यू करना था। लेकिन केजरीवाल के टेंशन में पता नहीं लोगों को शॉक्ड करने का विचार उनमें कहां से आ गया कि कोई दूसरी ही कविता फेंक मारी। इसका खुद कुमार विश्वास को भी अफसोस है।

खैर, जो हो गया सो हो गया। अब 55 हजार 724वीं बार फिर सुन (पढ़) लेते हैं उनकी वही पॉपुलर कविता….

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!

समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!

(Disclaimer : यह खबर कपोल कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)