हे राम, कहां तुम मर्यादा पुरुषोत्तम कहां यह नेता-युग !

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कवि कुंवर नारायण का आज 15 नवंबर 2017 को निधन हो गया।

हिंदी सटायर डेस्क। हिंदी के सुप्रसिद्ध और पद्मभूषण व ज्ञानपीठ सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण नहीं रहे। उनका आज यानी 15 नवंबर 2017 को निधन हो गया। वे 90 साल के थे।

इसी मौके पर इन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप आज पढ़ते हैं इनकी एक प्रसिद्ध कविता जो इन्होंने राम-जन्मभूमि आंदोलन के समय लिखी थी। इस कविता में उस दौर के हालात पर गंभीर व्यंग्य किया गया है।

अयोध्या, 1992

हे राम,
जीवन एक कटु यथार्थ है
और तुम एक महाकाव्य !

तुम्हारे बस की नहीं
उस अविवेक पर विजय
जिसके दस बीस नहीं
अब लाखों सर – लाखों हाथ हैं,
और विभीषण भी अब
न जाने किसके साथ है।

इससे बड़ा क्या हो सकता है
हमारा दुर्भाग्य
एक विवादित स्थल में सिमट कर
रह गया तुम्हारा साम्राज्य।

अयोध्या इस समय तुम्हारी अयोध्या नहीं
योद्धाओं की लंका है,
‘मानस’ तुम्हारा ‘चरित’ नहीं
चुनाव का डंका है !

हे राम, कहां यह समय
कहां तुम्हारा त्रेता युग,
कहां तुम मर्यादा पुरुषोत्तम
कहां यह नेता-युग!

सविनय निवेदन है प्रभु कि लौट जाओ
किसी पुरान – किसी धर्मग्रन्थ में
सकुशल सपत्नीक….
अबके जंगल वो जंगल नहीं
जिनमें घूमा करते थे वाल्मीक !

  • कुंवर नारायण

(Courtesy : kavitakosh)

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