By A. Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क, नई दिल्ली। तीन तलाक (triple-talaq) बिल गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। इसमें एक ही सीटिंग में तीन तलाक देने की प्रथा (तलाक-ए-बिद्दत) को अपराध करार देते हुए तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। हालांकि बिल में पतियों के हित में एक विशेष प्रावधान भी जोड़ा गया है कि अगर कोई पत्नी, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति की हो, लगातार 7 दिन तक पति को लौकी खिलाती है तो ऐसी स्थिति में पति तीन बार ‘NO लौकी NO लौकी NO लौकी’ कहकर तलाक देने के लिए पात्र होगा।

इसके लिए इस बिल में एक अलग से परिशिष्ट जोड़ा गया है जिसमें कहा गया है, “कानूनन किसी भी पति को हफ्ते में दो बार लौकी खिलाना विधि सम्मत है। लेकिन अगर कोई पत्नी लगातार 7 दिन तक अपने पति को लौकी खिला रही है तो इससे उसकी मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है। इससे यह कृत्य घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत अापराधिक श्रेणी में आ जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी पति, चाहे वह मुस्लिम हो या हिंदू या अन्य किसी भी धर्म, समुदाय या सम्प्रदाय से ताल्लुक रखता हो, उसे लौकी के खिलाफ संघर्ष करने का अधिकार रहेगा।”

क्या कहना है विधि विशेषज्ञों का?

इस बारे में विधि विशेषज्ञों ने बिल के इस विशेष प्रावधान पर भी सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है कि जो पति लगातार सात दिन तक लौकी खा रहा है, वह अपनी पत्नी से तीन बार ‘NO लौकी’ कहने की हिम्मत कर सकेगा, इसमें संदेह है। इसके लिए तो सरकार को और भी सख्त प्रावधान किए जाने की जरूरत है।

एक शादीशुदा विधि विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “बिल की इन पंक्तियों को पढ़ने से तो ऐसा प्रतीत हाेता है कि बिल बनाने वालों खासकर कानून मंत्री पर भी कहीं न कहीं कोई आंतरिक दबाव रहा होगा। इसलिए वे इस मामले में कोई स्पष्ट राय नहीं रख सके। शायद वे जानते होंगे बिल के पारित होने के बाद उन्हें घर पर भी जवाब देना होगा।”

पत्नियों की कड़ी प्रतिक्रिया …

लोकसभा से पारित इस बिल के विशेष प्रावधान पर देश भर की पत्नियों की कड़ी प्रतिक्रिया आई है। कई पत्नियों ने बड़े-बड़े अक्षरों में नाम छापने की शर्त पर कहा कि जो पति लौकी नहीं खा सकता, उसे पति होने का कोई हक नहीं। ऐसे पतियों को हम ही धक्के… मतलब तलाक दे देंगी। इसके लिए बिल में प्रावधान करने की जरूरत ही नहीं है

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल हास्य-परिहास करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)