गणेशजी ने धरती पर उतरने से किया इनकार, देवलोक में मचा हड़कंप

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देवलोक से हिंदी सटायर के विशेष प्रतिनिधि। एक तरफ धरती पर गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं तो उधर देवलोक में अफरा-तफरी का माहौल है। भगवान गणेश (Ganesh) ने इस बार धरती पर उतरने से साफ इनकार कर दिया है। मिलावटी भोग, लाउड स्पीकरों के शोर और गंदे तालाबों-नदियों में उन्हें विसर्जित करने की अत्यंत पीढ़ादायक प्रक्रियाओं को उन्हाेंने इसका प्रमुख कारण बताया है। उनके इस एलान के बाद उनकी मान-मनौव्वल का दौर जारी था।

इस प्रतिनिधि को अपने विश्वस्त सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार गणेशजी ने देवलोक में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर अायोजित देवताओं की एक सभा में यह घोषणा की। उनकी इस घोषणा से पूरा सदन हक्का-बक्का रह गया। अपने संक्षिप्त लेकिन बेहद भावुक उद्बोधन में गणेशजी ने कहा, “आज से करीब सौ साल पहले लोकमान्य तिलकजी ने मुझसे धरती पर आने का आह्वान किया था। आप लोगों से सलाह मशविरा कर मैं जनहित में भारत की धरती पर उतरने के लिए राजी हो गया। उस समय बहुत ही पवित्र मकसद था। लेकिन अब बीते कुछ सालों से मेरे नाम पर जो हाेता है, उसे देखकर मेरी आत्मा अंदर तक कांप जाती है। मुझे 10 दिन बिठाकर शुद्ध भाेग तक नहीं चढ़ाते। मिलावटी भोग से मेरा पेट खराब हो जाता है। लाउड स्पीकरों के शोर से मेरे कान पक जाते हैं। और फिर अंतिम दिन गंदे तालाबों-नदियों में मुझे विसर्जित कर मेरा दम घोंट दिया जाता है।”

इसके बाद गणेशजी यह कहते हुए सभा से बाहर चले गए कि अब वे धरती पर कभी नहीं जाएंगे, क्याेंकि वह उनके जैसे सीधे-साधे भगवान के लायक नहीं रह गई है।

मान-मनौव्वल का दौर जारी :

गणेशजी के इस एलान के बाद ही देवलोक की पूरी प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई। उन्हें मनाने के लिए ब्रह्माजी से गुजारिश की गई, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि ऐसी स्थिति में गणेश को केवल उनके पिता ही मना सकते हैं। लेकिन भगवान शंकर ने भी यह कहते हुए दखल देने से इनकार कर दिया कि गणेश उनके पुत्र हैं और इसलिए इस मामले में उनका दखल देना नैतिक रूप से ठीक नहीं होगा। उन्होंने विष्णुजी से एप्रोच लगाने की सलाह दी है।

लीपापोती की कोशिशें भी तेज :

धरती पर कोई अफरा-तफरी न फैले, इसको देखते हुए मामले में लीपापोती की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। देवलाेक के प्रवक्ता नारदजी ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर कहा है, “गणेशजी के बयान को गलत संदर्भों में लिया गया है। उन्होंने धरती पर उतरने से मना नहीं किया है। वे तो केवल इतना चाहते हैं कि उनकी प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों के बजाय मिट्‌टी की मूर्तियां स्थापित की जाएं। साथ ही उन्हें नदी-तालाबों में विसर्जित नहीं किया जाए। उनकी इस मांग पर देवलोक में विष्णुजी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है, जो जल्दी ही इस संबंध में कोई न कोई रास्ता निकाल लेगी।”

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल इंसानी सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं।)