सड़कों पर बने तालाबों में लगाए जाएंगे पॉवर प्लांट, केंद्र की नई योजना

(Monsoon Scheme) हिंदी सटायर, नई दिल्ली। देश में बिजली का प्रोडक्शन बढ़ाने के मकसद से केंद्र सरकार इसी मानसून सत्र से एक नई योजना ला रही है। राज्य सरकारों के सहयोग से शुरू होने वाली इस योजना के तहत बारिश के दौरान सड़कों पर बने बड़े-बड़े पाेखरों-तालाबों पर पॉवर प्लांट स्थापित कर बिजली बनाई जाएगी। इससे अतिरिक्त तीन लाख मेगावाट बिजली का प्रोडक्शन किया जा सकेगा।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय में पदस्थ एक सूत्र ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही जगह-जगह सड़कों पर पाेखर बन गए हैं। यह स्थिति आगामी कई महीनों तक ऐसी ही रहने वाली है। इसके मद्देनजर सरकार की मंशा इनमें एकत्र पानी का सदुपयोग करने की है। सूत्र के अनुसार केंद्र सरकार ने इस संंबंध में राज्यों के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है।

मप्र गदगद, कहां- हम बनाएंगे सबसे ज्यादा बिजली

मप्र और राजस्थान जैसे भाजपा शासित राज्य इस योजना से गदगद हैं। मप्र के एक मंत्री ने कहा, वैसे तो हमारे यहां इतना अच्छा वर्क कल्चर है कि पहली बारिश में ही इतने पर्याप्त गड्‌ढे हो जाते हैं कि खूब बिजली बनाई जा सकती है। फिर भी मप्र सरकार ऐसी सड़कों के निर्माण को बढ़ावा देगी जो बादलों को देखते ही अपने आप गड्‌ढों में तब्दील हो सके। उन्हाेंने कहा कि बारिश के दौरान तो भोपाल और इंदौर जैसे शहरों को हम डैम घोषित करके बिजली का प्रोडक्शन करने को तैयार हैं। इसके लिए हम जल्दी ही कैबिनेट में नालों पर अतिक्रमण बढ़ाने का प्रस्ताव भी लाएंगे।

उप्र ने कहा, हमारे यहां सड़कें ही कहां हैं?

लेकिन उप्र सरकार ने इस योजना की शर्त पर ही आपत्ति लगा दी है। उप्र सरकार को आपत्ति उस लाइन पर है जिसमें कहा गया है कि “सड़कों पर बने गड्‌ढों में बिजली संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।’ एक वरिष्ठ अधिकारी ने गर्व से बताया कि हमारे यहां ऐसी कोई सड़क नहीं है जिस पर गड्‌ढे हों। हां, यहां ऐसे कई गड्‌ढे हैं जिनमें कहीं-कहीं सड़क दिखाई दे जाएगी।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)