मप्र में केवल 13 जिले ही सूखाग्रस्त घोषित, आहत तीन अफसरों ने की सुसाइड करने की कोशिश

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हे भगवान! हमारे साथ इतना बड़ा धोखा क्यों? : अफसर

भोपाल। मप्र में इस साल केवल 13 जिलों को ही सूखाग्रस्त घोषित करने के राज्य सरकार के फैसले से आहत होकर तीन अफसरों ने सुसाइड करने की कोशिश की है। सरकार ने शर्मिंदगी से बचने के लिए इन तीनों अफसरों की पहचान उजागर नहीं की है।

कृषि और राजस्व महकमों से जुड़े इन तीनों अफसरों ने खुदकुशी की कोशिश करने से पहले जो सामूहिक सुसाइड नोट लिखा, उसकी एक कॉपी hindisatire.com को मिली है। इसमें इन अफसरों ने लिखा, “राज्य में पिछले कई सालों से मौसम हम सरकारी अफसरों पर मेहरबान रहा है। कभी खरीफ के सीजन में कम या ज्यादा बारिश करके तो कभी रबी की फसलों पर पाला पटककर। इस बार भी मौसम ने हमारा भरपूर साथ दिया। कई जिलों में फसलों को भारी नुकसान हुआ। लेकिन हमारी अपनी सरकार ने केवल 13 जिले ही सूखाग्रस्त घोषित किए। अब अकेले इनसे क्या होगा? जब हमारा ही सिक्का (पढ़ें सरकार) खोटा हो तो दूसरों को क्या दोष देना! सारी उम्मीदें टूट गई हैं। अब जीने की कोई वजह बाकी नहीं रही।”

सरकारी कर्मचारियों के लिए मुआवजे का एलान :

तीन अफसरों के इस प्रत्याशित कदम के बाद मप्र सरकार ने मुआवजा कोष बनाने का ऐलान किया है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “फसलें खराब होना या न होना प्रभु के हाथ में है। इस पर हमारा कोई बस नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हमारे ईमानदार सरकारी अफसर सुसाइड करने को मजबूर हो जाएं। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि दो साल पहले हमने जितनी राशि किसानों को मुआवजा देने में बर्बाद की थी (अफसरों का हिस्सा काटकर), उतनी ही राशि इस साल सरकारी अफसरों को दी जाएगी। हम एक कोष भी बनाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति आने पर अफसरों को कम्पनसेट कर सकें। जरूरत पड़ी तो इसके लिए हम वर्ल्ड बैंक से लोन लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।“

CM शिवराज ने कहा, हमारी सरकार अफसरों के साथ है…

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने भी एक ट्विट कर कहा, “अफसर घबराएं नहीं। संकट की इस घड़ी में हमारी सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है। मैं भरोसा दिलाता हूं कि अगर और भी जिलों को सूखाग्रस्त करने की जरूरत पड़ी तो हम यह भी करेंगे। जरूरत पड़ी तो मैं खुद इस संबंध में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें अफसरों की स्थिति से अवगत कराऊंगा।”

(Disclaimer : यह खबर कपोल कल्पित, लेकिन व्यंग्य सच्चा है। इसका मकसद केवल सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की व्यक्तिगत मानहानि करना नहीं।)