तक्षक की नागपंचमी पार्टी

ए. जयजीत

नागराज तक्षक बुढ़ा गए हैं, लेकिन नागपंचमी पर पार्टी करने का शौक गया नहीं। सदियों से वे यह मिल्क पार्टी थ्रो करते आए हैं। पहले इस पार्टी में विभिन्न नाग प्रदेशों के राजा-महाराजा और उनके मंत्री शामिल होते थे। लेकिन समय के साथ सब बदल गया। अब न फन वाले वे कोबरा रहे, न बात-बात पर फुफकारते करैट। इसलिए अब उनकी पार्टी में आमंत्रित गेस्ट भी न फन वाले होते हैं, न फुफकारने वाले। बस, मीठी-मीठी बात करने वाले लोग होते हैं।
पिछली बार की तरह इस बार भी तक्षक की पार्टी में रामभराेसेजी नजर आ रहे हैं। वे अपने क्षेत्र के जाने-माने नेता हैं। तक्षक का उनके प्रति विशेष स्नेह है। सांप टाइप के कई लोगों को रामभराेसेजी पालते आए हैं। इसलिए भी तक्षक से उनके विशेष रिश्ते बने हुए हैं।
‘महाराज की जय हो’, तक्षक से मिलते ही रामभरोसेजी दूध से भरा गिलास हवा में लहराते हुए बोले।
‘अब हम काहे के महाराज। अब तो कोई हमें पूजता नहीं। वो तो आप लोगों की मेहरबानी है कि नागपंचमी पर हम लोग मिल लेते हैं।’ तक्षक बड़ी ही विनम्रता के साथ बोले। संगत में आकर तक्षक भी अब जहरीले नहीं रहे।
‘मेहरबानी तो आपकी है। अगर आप नहीं होते तो हम नेता लोग कहां से पैदा होते? दूध पीकर जहर उगलना आपसे ही सीखा है… हा हा हा’ नेताजी ने ठहाका लगाया।
नेताओं के साथ सांपों की तुलना तक्षक को चुभ गई। जो भी हो, अपनी जात का अपमान कोई सहन कर सकता है भला! मन में विचार भी आया, महाभारत काल होता तो इसी समय जहर उगलकर भस्म कर देते, लेकिन अब स्साला जहर भी नहीं बचा। कड़वा घूंट पीते हुए बात को डायवर्ट किया, ‘रामभरोसेजी, बाकी लोग कहां हैं? आए नहीं।’
‘आएंगे क्यों नहीं, आपकी पार्टी का तो महीनों इंतजार रहता है। लो सिंह साहब तो आ भी आ गए।’
सिंह साहब एक बड़े रुतबेदार अफसर हैं। एक भी फाइल उनकी निगरानी के बगैर आगे नहीं बढ़ती। रामभरोसेजी जैसे नेताओं के साथ उनके अच्छे ताल्लुकात हैं।
‘मलाई मारकर दूध देना।’ सिंह साहब को देखते ही तक्षक ने वेटर से कहा। तक्षक जानते हैं कि सालों से सत्ता की मलाई खाने वाले सिंह साहब उनकी दूध पार्टी में भी मलाई वाला दूध ही पीना पसंद करते हैं।
‘फाइल का क्या हुआ, कुछ प्रगति हुई उसमें?’ तक्षक ने सिंह साहब से पूछा। दरअसल, हम खुलासा कर दें कि तक्षक भी इन दिनों प्राॅपर्टी के बिजनेस में उतर आए हैं। उनका एक प्राजेक्ट महीनों से अटका हुआ है। वे उसी की बात कर रहे हैं।
‘अरे आपका प्रोजेक्ट कहां अटकने वाला है। हम आप एक ही परिवार के हैं। कुछ फार्मलिटीज बची है। जल्दी ही क्लियर हो जाएगा।’ मलाई की कटाेरी की ओर हाथ बढ़ाते हुए सिंह साहब बोले।
धीरे-धीरे पार्टी की रौनक बढ़ती जा रही है। शहर के जाने-माने ठेकेदार, इंजीनियर, वकील, पुलिस के पूर्व अफसर, फाॅरेस्ट के अधिकारी आदि पहुंच गए हैं। नागिन डांस भी शुरू हो गया है।

कार्टून : गौतम चक्रवर्ती