Exclusive : नल्ले इंजीनियरों ने PM को पत्र लिखकर क्यों मांगी ‘पकौड़ा कुंजी’?

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By A. Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पकौड़ों संबंधी बयान के 20 दिन बाद बेरोजगार इंजीनियरों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को शिकायत की है। इनकी शिकायत है कि तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी देश के बाजारों में अब तक पकौड़ा कुंजी नहीं आई है। इस वजह से वे अब तक नल्ले के नल्ले बैठे हैं और काम-धंधा शुरू नहीं कर पाए हैं।

अखिल भारतीय नल्ला इंजीनियर संघ के राष्ट्रीय सचिव ‘इंजी. संपत करमखोटी’ ने इस संबंध में PMO को पत्र लिखा है। इसकी CC हिंदी सटायर को की गई है। हम इस पत्र की 112 प्रूफ संबंधी त्रुटियों को दुरुस्त कर उसे हूबहू अपने रीडर्स के समक्ष पेश कर रहे हैं :

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
देश के प्रधानसेवक जी को हम तुच्छ सेवकों का सादर प्रणाम!

आपने कुछ दिन पहले बताया कि पकौड़े बनाकर कोई भी अच्छा काम-धंधा कर सकता है। यह बहुत ही क्रांतिकारी विचार है और देश के तमाम इंजीनियर इसका स्वागत करते हैं। लेकिन पकौड़े कैसे बनाए, सरकार की ओर से इसकी ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

प्रधानमंत्री जी, हम इंजीनियर होने के बावजूद मां भारती की सेवा में कुछ करना चाहते हैं। लेकिन हम जब किसी पकौड़े वाले के पास जाकर सिखाने का निवेदन करते हैं तो उल्टे हम पर ताने मारते हुए कहता है- ‘आप तो पढ़े-लिखे हैं। कोई अच्छा काम कीजिए, पकौड़ों को बख्श दीजिए।’

फिर हमने सोचा कि चलो, किसी किताब-विताब से कुछ सीखते हैं, लेकिन इंजीनियर होने के नाते हमारी अंतरात्मा ने ऐसा करने से हमें रोक दिया। अंतरात्मा ने इस सोच पर लताड़ते हुए कहा- अबे स्सालो इंजीनियरों, आज तक किताब को हाथ नहीं लगाई। हमेशा कुंजियां पढ़-पढ़कर ही नाम के आगे इंजीनियर लगाने की औकात पाई है। अब इत्ते बुरे दिन आ गए कि किताब पढ़ने चले?”

तो प्रधानसेवक जी, पकौड़ा वाला हमें सिखाता नहीं है, इंजीनियर होने के नाते हम किताबें पढ़ नहीं सकते। बची केवल कुंजियां। लेकिन आपके उस ऐतिहासिक बयान के तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद बाजार में ऐसी एक भी कुंजी उपलब्ध नहीं है जो सिखाए कि पकौड़े कैसे बनाए।

भगवान ने हमें इंजीनियर बनाकर हमारे साथ जो मजाक किया सो किया, उसे हक है। लेकिन आप तो देश के सबसे बड़े सेवक हैं। आपको ऐसा भद्दा मजाक करने का कोई अधिकार नहीं है। आपसे निवेदन है कि जैसे आपने बच्चों के लिए एग्जाम स्ट्रेस पर किताब लिखी, उसी तरह हम इंजीनियरों के लिए पकौड़े सिखाने पर कुंजी लिखकर हमें अनुग्रहित करने का कष्ट करें। हो सकता है, आपके आशीर्वाद से हममें से कोई पकौड़ा बनाना सीखकर किसी दिन देश का दूसरा प्रधानसेवक ही बन जाएं। समय का क्या भरोसा!!

जयहिंद!

आपका ही..

इंजी. संपत करमखोटी
राष्ट्रीय सचिव
अखिल भारतीय नल्ला इंजीनियर संघ

(Disclaimer : यह खबर कपोल कल्पित है। इसका मकसद केवल pakoda-politics करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)