बागी विधायकों, पतियों से लेकर हिंदी के साहित्यकारों तक… जानिए इनके आत्मनिर्भर होने के मायने

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By Jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘आत्मनिर्भर’ होने का क्रांतिकारी मंत्र दिया था। आइए जानते हैं कि अलग-अलग वर्गों के लिए इसके क्या मायने हैं :

हिंदी साहित्यकार के लिए : हर हिंदी साहित्यकार का अपना-अपना पर्सनल खेमा होगा। कोई दूसरे खेमे में जाने को मजबूर नहीं होगा। इससे हमारा हिंदी साहित्य ऐसी ओछी बातों से मुक्त हो सकेगा कि ‘हिंदी साहित्य दो खेमे में बंटा’। हर साहित्यकार के पास दूसरे साहित्यकार को दुत्कारने की अपनी स्वनिर्मित ऑरिजिनल गालियां भी होंगी।

पतियों के लिए : अब यह बर्तन मांजने से लेकर किसी भी अन्य जरूरी काम के लिए पत्नी की डांट-डपट पर निर्भर नहीं रहेगा। स्वप्रेरणा से खुद को ही डांटते हुए खुद ही किसी वीर यौद्धा की भांति बर्तन मांजकर खुद ही पोछ-पाछकर छींके पर जमा देगा। आत्मनिर्भरता के लिए इसका मंत्र होगा – खुद से खुद तक…।

बागी विधायकों के लिए : अब हर बागी मानसिकता वाले विधायक का अपना दाम ही नहीं, अपना खुद का रिजॉर्ट भी होगा। उसका खुद का AI बेस्ड ऐसा सिस्टम होगा कि उसे अपने आप पता चलता रहेगा कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए उसे किसके सामने अपनी बोली पेश करनी है और कितनी।

साइबेरियाई पक्षियों के लिए : भारत में ठंड शुरू हो गई है कि नहीं, इसके लिए साइबेरियाई पक्षी हर साल केजरीवालजी के मफलर धारण करने का इंतजार करते आए हैं। अब वे भारत में अपनी मफलरपीठें स्थापित करेंगे जिनमें उनके स्थानीय प्रतिनिधि बैठेंगे और वे खुद ही मफलर धारण करके अपनी जमातों के लिए संकेत देंगे कि आ जाओ भाइयों, ठंड शुरू हो गई है।

शराबियों के लिए : देश के सबसे मजबूत आर्थिक स्तंभ यानी शराबी पहले से पर्याप्त आत्मनिर्भर हैं। फिर भी उनके लिए आत्मनिर्भर होने का सिर्फ इतना ही मतलब है कि हर दारूड़े का अपना-अपना चखना होगा। किसी को दूसरे के चखने पर हाथ मारने की मजबूरी नहीं होगी। ‘मेरी दारू, मेरा चखना’ इनका मूल मंत्र होगा।

बीजेपी के लिए : यह अब अपनी जीत के लिए राहुल गांधी नामक व्यक्ति पर डिपेंड नहीं रहेगी। अपने दम पर ही जीत हासिल करेगी। अब मोदीजी अपने मित्र ट्रम्प को चुनाव जितवाने के लिए राहुलजी को अमेरिका एक्सपोर्ट कर सकेंगे, ताकि वहां राहुल, ट्रम्प के विरोधियों के पक्ष में प्रचार कर ट्रम्प की जीत सुनिश्चित कर सकें।

कांग्रेस के लिए : अब जब भी यूपी या बिहार में चुनाव होंगे तो जमानत जब्त करवाने के लिए यह दूसरों दलों पर निर्भर नहीं रहेगी। अपने दम पर ही अपने उम्मीदवारों की जमानत जब्त करवाएगी।

अखिलेश के लिए : पिताश्री मुलायम यादव जी क्या बोल रहे हैं, यह समझने के लिए उन्हें अब किसी दुभाषिए की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुलायम सिंह से ट्रेनिंग लेकर खुद ही उनकी भाषा को समझने में आत्मनिर्भर बनेंगे।

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Google Translation (With small modification)

From rebel MLAs, husbands to Hindi litterateurs… know the meaning of their self-reliance (atma nirbhar)

Desk. Prime Minister Narendra Modi on Tuesday gave a revolutionary mantra of being ‘self-reliant’ (atma nirbhar) . Let us know what this means for different classes:

For Hindi litterateur: Every Hindi litterateur will have his own personal camp. No one will be forced to move to another camp. With this, our Hindi literature will be free from such petty things that ‘Hindi literature is divided into two camps’. Every litterateur will also have his own original original abuses to reprimand another litterateur.

For husbands: Now, from cleaning this utensil to any other important work, the wife will not depend on the scolding. Scolding himself with self-motivation, like a heroic warrior, he would scavenge the utensils himself and wipe himself and freeze it on the sneeze. Its mantra for self-reliance will be – from oneself to oneself….

For rebel MLAs: Now every rebel MLA will not only have his own cost, but will also have his own resort. His own AI-based system will be such that he will automatically know who he has to submit his bid to save democracy in the country and how much.

For Siberian birds: The cold has started in India or not, for this Siberian birds have been waiting for Kejriwalji to wear muffler every year. Now they will set up their muffler benches in India in which their local representatives will sit and they themselves will wear mufflers to indicate to their deposits that come on brothers, the cold has started.

For alcoholics: The strongest economic pillar of the country i.e. drunkards is already self sufficient. Yet, being self-sufficient (atma nirbhar) for them only means that every wine will have its own taste. There will be no compulsion to throw one’s hand at the tasting of another. ‘Merry Daru, Mera Chakhna’ will be their basic mantra.

For BJP: It will no longer depend on a man named Rahul Gandhi for his victory. Will win on its own. Now Modiji will be able to export Rahulji to America to win the election to his friend Trump, so that Rahul can campaign there in favor of Trump’s opponents and ensure Trump’s victory.

For Congress: Now whenever elections are held in UP or Bihar, it will not depend on other parties to get the bail forfeited. Will forfeit the bail of its candidates on its own.

For Akhilesh: He will no longer need an interpreter to understand what Father Shree Mulayam Yadav is saying. By training with Mulayam Singh, he himself will become self-sufficient in understanding their language.