भारतीय वैज्ञानिकों ने किया ‘ग्रैविटी रेजिस्टेंस वैक्सीन’ बनाने का दावा, चूहों पर प्रयोग सफल, अब नेताओं की बारी

बेंगलुरु। बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट फाॅर स्टेम सेल बाॅयोलॉजी के वैज्ञानिकों ने ‘ग्रैविटी रेजिस्टेंस वैक्सीन’ के विकास का दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे दुनिया को और नीचे गिरने से राेका जा सकेगा। चूहों पर सफल प्रयोग के बाद वैज्ञानिक अब भारतीय नेताओं पर प्रयोग करने जा रहे हैं। इसमें सफलता मिलने पर इसे पूरी मानव जाति के लिए उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
इस वैज्ञानिक दल का नेतृत्व कर रहे डॉ. जीवीएन अय्यर ने बताया कि फिलहाल चूहों पर ये प्रयोग किए गए हैं। ‘ग्रैविटी रेजिस्टेंस’ का टीका लगाने के बाद उनमें जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है। ‘ग्रैविटी रेजिस्टेंस चूहों’ में जगह-जगह जाकर कूतरने की आदत खत्म गई। डॉ. अय्यर के अनुसार इसी तरह हमारे इस टीके से मनुष्यों में भी नीचे गिरने वाले लक्षण खत्म होने की उम्मीद है। उन्होंने मानवीय एक्पेरिमेंट्स के लिए नेताओं पर प्रयोग करने का निश्चय किया है और इस संबंध में सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों को पत्र लिखकर एक-एक गिरा हुआ नेता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

दावे पर संदेह भी जताया

इस बीच, डॉ अय्यर और उनकी टीम के इस दावे पर जाने-माने ब्रिटिश स्टेम सेल साइंटिस्ट डॉ. जॉन कर्जन ने संदेह व्यक्त किया है। उनका कहना है कि चूहों पर भले ही प्रयोग सफल हो गया हो, लेकिन ‘ग्रैविटी रेजिस्टेंस मनुष्य’ बनाना इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि विकास के करोड़ों वर्षों में मनुष्य में नीचे गिरने वाली इतनी कोशिकाएं विकसित हो चुकी हैं कि केवल एक वैक्सीन से उन पर काबू नहीं पाया जा सकता। उन्होंने नेताओं पर प्रस्तावित प्रयोग को तो और भी हास्यापद बताया है और कहा है कि ऐसा करके अय्यर अपनी इस खोज की विश्वसनीयता को जोखिम में डाल रहे हैं।

मोदी सरकार ने किया संपर्क!

हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पहली बार गंभीर आरोपों से जूझ रही मोदी सरकार ने भी इस वैक्सीन के लिए डॉ. अय्यर की टीम से संपर्क किया है। उसने पूछा है कि क्या हमारी सरकार के लिए ऐसा टीका बनाया जा सकता है जो हमारी गिरती छवि को रोक सके।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)