Exclusive Interview : शिवराज को काटने वाले मच्छर की बदल गई ज़िंदगी

Shivraj singh , Shivraj singh chouhan, Shivraj singh chouhan mosquito, शिवराज सिंह चौहान व्यंग्य , मच्छरों पर जोक्स, मच्छर व्यंग्य, नेताओं पर कटाक्ष, neta per jokes

By jayjeet

हिंदी सटायर डेस्क। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सीधी के गेस्टहाउस में मच्छरों द्वारा काटने की जैसे ही खबर आईं, रिपोर्टर कुछ नया करने के जुनून से भर उठा। वह जुट गया उस सौभाग्यशाली मच्छर की तलाश में… कुछ ही घंटों के भीतर उसे गेस्टहाउस के पास मच्छरों का मजमा लगाए एक मच्छर मिला। कुछ समझदार मच्छरों से पूछताछ करने पर पता चला कि दो दिन पहले तक यह ठीक था। लेकिन पिछले दो दिन से यह भाषण पर भाषण पेले जा रहा है। सभी मच्छरानियों को माताएं-बहनें कह रहा है। छोटी-छोटी मच्छरियों से कह रहा है कि जब तक तुम्हारा मच्छर मामा है, तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है….रिपोर्टर की तलाश पूरी हो गई थी। उसे वह मिल गया था, जिसने शिवराज सिंह को काटा था। अपाइंटमेंट मिलते ही तुरंत शुरू हुआ यह इंटरव्यू। दुनिया का पहला इंटरव्यू किसी मच्छर के साथ…

रिपोर्टर : मच्छर महोदय, एक विशिष्ट हस्ती के साथ आप रूबरू हुए। उनके साथ कैसा अनुभव रहा?
मच्छर : मेरी पूरी जिंदगी ही बदल गई। एक दिव्य अनुभूति हुई है। आप देख ही रहे हैं, कैसा रूपान्तरण हो गया है मेरा। मेरे मुंह से भाषण पर भाषण फूट रहे हैं।

रिपोर्टर : आप आम आदमी को भी काटते हैं और आपने एक नेता को भी काटा। दोनों में क्या अंतर महसूस हुआ?
मच्छर : देखिए, एक आम आदमी को काटना बड़ा आसान होता है। उसकी चमड़ी तो चमड़ी जैसी होती ही नहीं। बिल्कुल झिल्ली सी। प्रोटीन विहीन कमजोर सी। ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। डंक टच करते ही वह चमड़ी को पार कर जाता है। लेकिन नेताओं के साथ बड़ी मुश्किल होती है। बड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कई बार हमारे डंक तक टूट जाते हैं। जो नेता का खून पीकर आता है, उसका हमारे यहां बड़ा सम्मान भी होता है। उसे नेता डंकमणि की उपाधि तक दी जाती है।

रिपोर्टर : खून-खून में भी कुछ फर्क होता है?
मच्छर : बिल्कुल। क्वालिटी में अंतर होता है। आम आदमी का खून क्या होता है। बिल्कुल पानी होता है। कुछ भी न्यूट्रिशियस उसमें नहीं होता। और अगर वह आम आदमी और भी टुच्चा-सा हुआ, आई मीन गरीब-गुरबा तो फिर तो कई बार हमारी जान पर बन आती है। गंदा पानी और स्प्रिट मिली कच्ची दारू पीने और रुखी-सूखी दो-चार रोटियां खाने वाले के खून में भला होगा भी क्या! ऐसा दूषित खून पीकर तो कई बार हमारे मच्छर लोग बीमार पड़ गए। हमने तो गर्भवती मच्छरानियों, बूढ़े-बुजुर्गों को झुग्गियों या छोटी बस्तियों में न जाने की हिदायत तक दे रखी है।

रिपोर्टर : पर नेताओं के खून में ऐसा क्या होता है जिसके आप बड़े मुरीद होते हैं?
मच्छर : देखिए, जैसा मैंने पहले बताया कि नेताओं का खून तो हम बड़ी मुश्किल से पी पाते हैं। हां, सरकारी अफसरों की चमड़ी अपेक्षाकृत थोड़ी पतली होती है। तो उनका खून हमारे लिए मुफीद रहता है। अच्छा तरी वाला खून होता है। शुद्ध घी, ऑर्गनिक सब्जियों और ड्राय-फूट्स के फ्लेवर होते हैं। तो हम सब उन्हीं का खून पीने को लालायित रहते हैं। कई बार तो हमारे यहां अफसरों का खून पीने को लेकर डंक तक चल गए, वो आपके यहां क्या कहते हैं, तलवारें चलना, वही समझ लो…

रिपोर्टर : पर अफसरों का खून भी इतनी आसानी से मिल जाता है?
मच्छर : वही तो कह रहा हूं कि एक अनार सौ बीमार जैसी स्थिति है। जैसे आम जनता का कैबिन में बंद अफसर से मिलना इतना आसान नहीं रहता , वैसे ही रात को मच्छरदानियों में बंद अफसरों का खून मिलना आसान नहीं रहता। …. अच्छा अब मैं चलता है। मुझे अगला भाषण देने पड़ोस की बस्ती में जाना है….

रिपोर्टर : बस आखिरी सवाल, इतनी चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच आखिर आप एक मुख्यमंत्री के कक्ष में कैसे पहुंच गए?
मच्छर : जैसे हर सिस्टम में छेद होते हैं, वैसे ही हर मुख्यमंत्री के कक्ष में कुछ ऐसे छिद्र होते हैं जहां से हम पहुंच जाते हैं। बस पहुंचने वाला चाहिए… अच्छा नमस्कार।

(Disclaimer : यह केवल राजनीतिक कटाक्ष है, किसी की व्यक्तिगत मानहानि का प्रयास नहीं।)

इसी पर 30 सेकंड का हास्यास्पद वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें…

# Shivraj singh # Shivraj singh chouhan, # Shivraj singh chouhan mosquito bite