सच्ची बात : त्रिपुरा में BJP की जीत के ‘बड़े वाले’ हीरो ये शख्स हैं, मोदी नहीं!

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हिंदी सटायर पॉलिटिकल डेस्क। आज बीजेपिये खुश तो बहुत होंगे। क्यों नहीं होंगे! आखिर त्रिपुरा में सत्ता के दुर्ग पर पिछले 25 साल से जो लाल रंग का ध्वज लहरा रहा था, उसकी जगह अब भगवा ने ले ली है। यहां बीजेपी पहली बार सरकार बनाने जा रही है। लेफ्ट के इतने मजबूत किले को ढहाने में जिस एक शख्स की प्रमुख भूमिका रही है, वे मोदी नहीं, बल्कि कोई और हैं।

कौन हैं ये शख्स?

ये शख्स हैं सुनील देवधर। ये वैसे तो महाराष्ट्र के हैं, लेकिन आरएसएस के प्रचारक होने की वजह से इन्होंने एक तरह से पूरा देश घूम लिया है। 52 साल के देवधर को त्रिपुरा चुनावों से कुछ अरसा पहले ही राज्य में बीजेपी का औपचारिक प्रभारी बनाया गया था। हालांकि वे राज्य में पिछले दो साल से जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रहे थे।

ऐसे बनाई प्लानिंग…

क्या दो साल पहले कोई सोच सकता था कि त्रिपुरा में बीजेपी सरकार बना सकती है? केवल नरेंद्र मोदी, अमित शाह और सुनील देवधर के अलावा कोई  और नहीं। ये तीन शख्स ही ऐसे थे जो नार्थ-ईस्ट के इस राज्य पर नजर रखे हुए थे। इसके लिए खासकर सुनील देवधर ने माइक्रो लेवल पर प्लानिंग बनानी शुरू की। वहां उन्होंने एक-एक मतदाता से संपर्क करने की योजना बनाई। सुनील देवधर ने वोटर लिस्ट के एक-एक पन्ने के लिए एक-एक डेडिकेडेट कार्यकर्ता को लगाया। त्रिपुरा की वोटर लिस्टिंग में कुल 48 हजार पन्ने थे। इस तरह उन्होंने 48 हजार कार्यकर्ता चुने। हर पन्ने पर जिन वोर्टस के नाम थे, उनसे इन कार्यकर्ताओं को संपर्क करने को कहा गया। इस तरह वहां करीब 100 फीसदी वोटर्स से लाइव कांटैक्ट करने का प्रयास किया गया। इसका नतीजा सामने है। 5 साल पहले केवल डेढ़ फीसदी वोट पाने वाली बीजेपी आज करीब 50 फीसदी वोट पाकर सत्ता में आ गई है। इसका पूरा श्रेय सुनील देवधर की इस माइक्रो प्लानिंग को ही दिया जाना चाहिए।

शुरू से रहे हैं मोदी के खास…

– साल 2014 के आम चुनावों के दौरान सुनील देवधर को वाराणसी संसदीय सीट के लिए वहां से चुनाव लड़ रहे नरेंद्र मोदी का कैम्पेन मैनेजर बनाया गया था।
– 2013 में देवधर ने गुजरात के दाहोद में रहकर बीजेपी की चुनाव रणनीति पर काम किया था। उन्हें मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही गुजरात लेकर आए थे।
– इससे पहले 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान उन्हें साउथ दिल्ली का जिम्मा सौंपा गया था। वहां उन्होंने 10 में से 7 सीटों पर जीत दिलाई।