Not Funny : हे सुशांत, तुम इस खूबसूरत दुनिया में जीने के लायक न निकले…

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(तमाम बदसूरती के बाद भी बड़ी खूबसूरत है यह दुनिया …. जॉर्ज बर्नार्ड शा )

By Jayjeet

हमने इस सदी का सबसे भयावह दौर देखा… अब भी देख रहे हैं। एक तरफ दूरदर्शन पर हस्तिनापुर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही थी, तो उन्हीं आंसुओं के बीच हमने लाखों भूखे बच्चों के आंसुओं को महसूस किया। हजारों के पैरों में हुए छालों को महसूस किया। इसी दौरान लाखों लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई। उनकी पथराई आंखों में नाउम्मीदी को महसूस किया। लेकिन इनमें से शायद ही किसी ने हार मानकर खुद को ईश्वर के हवाले कर दिया होगा। कोटि-कोटि नाउम्मीदों के बीच आज भी इनके बीच उम्मीद का एक छोटा-सा दीपक टिमटिमा रहा है कि कभी तो वो दिन आएगा जब उनके बच्चों को दोनों समय भरपेट भोजन मिलेगा, कि कभी सिर पर अपना एक झोपड़ा होगा… कि कभी फिर वे अपने काम पर लौट सकेंगे…

मगर, हे सुशांत सिंह ….हमें नहीं मालूम, तुम्हें क्या गम था। लेकिन इतना जरूर मालूम है कि तुमने जिस निष्ठुरता के साथ यह दुनिया छोड़ दी, उससे तुम शायद उस ईश्वर को मुंह ना दिखा पा रहे होंगे जिसने तुम्हें इतनी नजाकत से तराशकर इस संसार में उतारा था। उसने क्या नहीं दिया था? एक खूबसूरत चेहरा, एक उत्कृष्ट दिमाग (11 इंजीनियरिंग एन्ट्रेंस एग्जाम पास करने और फिजिक्स ओलिम्पियाड का नेशनल विनर बनने का माद्दा), एक अच्छा परिवार और सफलताओं का अंतहीन सिलसिला… और भी बहुत कुछ, अनंत …

आज जब तुम ऊपर की दुनिया में पहुंचे होंगे तो ईश्वर को तुमसे यह कहते हुए कतई दुख नहीं हो रहा होगा कि अच्छा हुआ सुशांत तुम वापस आ गए। तुम उस खूबसूरत दुनिया में रहने के लायक ना थे …

काश, तुम कुछ दिन पहले एक मजदूर परिवार को ही सड़क पर से गुजरते देख लेते तो तुम्हारा सारा डिप्रेशन आज चर्चा का विषय न बना होता…

(Disclaimer : मृतक आत्मा के प्रति किसी भी तरह का अनादर करना इसका उद्देश्य नहीं। उनके टैलेंट को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाता रहेगा।)