हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है Taj Mahal, लेकिन एक माह में बना देंगे, किसने किया ये दावा?

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ताजमहल की साफ-सुथरी दीवारों को देखकर ही शर्म आती ही!!!

आगरा। ताज महल (Taj Mahal) हमारी संस्कृति का हिस्सा है या नहीं, इसे लेकर छिड़े विवाद में अखिल भारतीय पान-गुटखा पीक संघ भी कूद पड़ा है। पान-गुटखा पीक संघ (इसका RSS से कोई संबंध नहीं है) ने कहा है कि अगर एक माह के लिए ताजमहल उनके हवाले कर दिया जाए तो वे इसे पूरी तरह से आज की हमारी संस्कृति का हिस्सा बना देंगे।

पान-गुटखा खाकर पीक मारने वाले इस संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता लालचंद थूकू ने यहां मंगलवार को ताजमहल के बाहर एक प्रेस कांफ्रेंस करके इस बात का दावा किया। मुंह में भरे पान मसाला की पीक को कुर्सी के पाए पर थूकते हुए उन्होंने कहा, ‘हम इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते कि ताजमहल कब्रगाह है या मंदिर, लेकिन यहां पान-गुटखे की एक भी पीक नहीं दिखने और साफ-सफाई से यह तो जाहिर होता है कि ये हमारी संस्कृति का हिस्सा कदापि नहीं है। सच कहे तो खुद ताजमहल को इस पर शर्म आनी चाहिए। हमें तो यह समझ नहीं आता कि वह इतने लंबे अरसे से यहां खड़ा कैसे है। इसे तो अब तक पीछे बह रहे नाले में डूब मरना था।’

मुंह में गुटखे का नया पाउच उड़ेलते हुए उन्होंने आगे कहा, “इसके लिए केवल ताजमहल जिम्मेदार नहीं है। अगर ताजमहल की दीवारें लाल नहीं हैं तो इसके लिए हम लोग भी बराबर के जिम्मेदार हैं। लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है। ताजमहल हमें सौंप दिया जाएं। हम इसे केवल महीने भर में हमारी उन्नत संस्कृति का हिस्सा बना सकते हैं।”

आप यह कैसे कर लेंगे, राहुल गांधी टाइप एक मासूम से रिपोर्टर ने यह सवाल पूछ लिया। इस पर लालचंद थूकू ने अपनी टेबल पर पड़े ताजमहल के मॉडल पर मुंह का गुटखा थूकते हुए कहा, “ऐसे। वेरी सिंपल, पप्पू।”

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)