जब ऊपर जब्बार भाई की एंडरसन से हुई मुलाकात

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By Jayjeet

जन्नत (स्वर्ग) पहुंचने के 48 घंटे बाद जब्बार भाई ने दो घंटे के लिए दोज़ख़ (नर्क) जाने की स्पेशल परमिशन मांगी, जो तुरंत मिल गई…दोज़ख़ पहुंचे तो गेट पर ही एंडरसन खड़ा था…भोपाल गैस त्रासदी का असली गुनहगार… हाथ बांधे, सिर झुकाए…

जब्बार भाई : कैसे हो एंडरसन?

एंडरसन : बस आपका ही इंतजार था…हमें खबर तो मिल ही गई थी।

जब्बार भाई : क्यों, अपने किए की माफी मांगने आए हों?

एंडरसन : मैं आपका और हजारों लोगों का दोषी हूं। पूरी मानव जाति का दोषी हूं। मैं जानता हूं कि मैं माफी के लायक नहीं हूं। माफ आप करेंगे भी नहीं, करना भी नहीं चाहिए….आप मुझे भला-बुरा कहने आए हैं, गालियां देने आए हैं और मैं इसीलिए आपके सामने उपस्थित हूं…

जब्बार भाई (हंसते हुए) : अरे एंडरसन, हमने तो तुझे उसी दिन माफ कर दिया था जिस दिन तू भारत से भागा था …

एंडरसन : क्या? माफ कर दिया..!!!

जब्बार भाई : हां, तू तो उसी अमेरिकी साम्राज्यवादी व्यवस्था का एक प्रतिनिधि मात्र था जो सारी दुनिया पर थोपी जा रही थी, अपने जहरीले उत्पादों के लिए भारत जैसे देशों को डम्पिंग ग्राउंड बनाने वाली व्यवस्था का प्रतिनिधि …

एंडरसन: तो अब आप यहां क्यों आए हों? किसे ढूंढने आए हैं?

जब्बार भाई? : मैं तो उन हरामी हिंदुस्तानियों को ढूंढने आया हूं जिन्होंने चंद पैसों के लालच में तुझ जैसे भेड़िये की साजिश में साथ दिया… तमाम किस्म की लापरवाहियों के मूकदर्शक बने रहे ताकि तेरा धंधा भी चलता रहे और उनका भी। जब अपने ही अपनों के दुश्मन बन गए तो तुझ पराए को क्या कहूं…

एंडरसन (सिर झुकाए हुए) : हां, मैं इससे वाकिफ हूं। मेरे अफसरों ने भी बताया था कि मेरी फैक्ट्री में गड़बड़ियां सालों से चली आ रही थीं। लेकिन भारतीय अफसरों ने जानते-बुझते उन पर ध्यान नहीं दिया। बस उन्हें, उनका पैसा मिल जाता था।

जब्बार भाई : जिन्होंने तुझे भगाने में मदद की उनमें से कुछ यहां हैं। हां, कुछ हरामी अब भी धरती पर हैं। वे भी जल्दी ही आने वाले हैं। उनके खिलाफ धरती की अदालत ने तो मुकदमा खारिज कर दिया था। पर मैं यहां दोज़ख़ की कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने आया हूं। उम्मीद है यहां की अदालत में तो इंसाफ होगा ही…

एंडरसन : मैं कुछ ऐसे लोगों को भी जानता हूं, जिन्होंने मुआवजे की रकम में भी भारी घपला किया।

जब्बार भाई : सही कहा। जो असली पीड़ित थे, उन तक तो मुआवजा भी नहीं पहुंचा। तेरे जहर से ग्रस्त ऐसे लोगों की दूसरी पीढ़ी भी उसके दंश झेल रही है। पता नहीं, ऐसे लोगों का मुआवजा हड़पते समय भी उनकी आत्मा कांपी क्यों नहीं? यहां कहां हैं वे लोग?

एंडरसन : मिथाइल आइसोनेट गैस के चेम्बर में। उन्हें यही सजा मिली है। और मुझे भी…

(थोड़ी देर की चुप्पी…)

अब आप कृपया जन्नत के लिए प्रस्थान कीजिए। ये नरक हम लोगों के लिए छोड़ दीजिए… नमस्ते…

जब्बार भाई भारी कदमों से जन्नत की ओर लौट चले….उन कई मासूमों से मिलने जो अपना बचपन भी अभी जी नहीं पाए थे….।

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