नेताओं को मिला रंग बदलने का अधिकार, नाराज गिरगिट नहीं खेलेंगे होली

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देख गिरगिटिया, हम तेरे से ज्यादा रंग बदलते हैं। और ऐसा बदलते हैं कि पता भी नहीं चलता!

By Jayjeet

नई दिल्ली/देवलोक। गिरगिटों ने देवलोक के उस फैसले के विरोधस्वरूप इस बार होली नहीं खेलने का फैसला किया है, जिसके तहत नेताओं के रंग बदलने के गुण को आधिकारिक मान्यता प्रदान कर दी गई है। देवलोक ने हाल ही में नेताओं के इस अधिकार पर मोहर लगाई थी। गिरगिटों ने देवलोक के इस फैसले को उनके (गिरगिटों के) रंग बदलने के पेटेंट राइट्स का उल्लंघन बताया है।

गिरगिटों ने यह निर्णय यहां होली की पूर्व संध्या पर अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक आपातकालीन बैठक में लिया। गिरगिट राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष डॉ रंगबदलू गिरगिटिया ने जैसे ही नेताओं के रंग बदलने के अधिकार को देवलोकीय मान्यता मिलने का खुलासा किया, बैठक में हलचल मच गई। सभी गिरगिटों ने एक स्वर में देवलोक के इस निर्णय का विरोध किया।

गिरगिट परिषद के उपाध्यक्ष लाल-पीला सिंह ने कहा, “सब जानते हैं कि नेता रंग बदलने में हमसे भी ज्यादा माहिर हैं। लेकिन इसके बावजूद उनकी इस प्रवृत्ति को मान्यता प्रदान करना गिरगिटों के खिलाफ है। यह नेचुरल पेटेंट एक्ट की धारा 221 का भी उल्लंघन है। यह धारा अतिविशिष्ट गुणों का संरक्षण करने का अधिकार प्रदान करती है।” इसके बाद उपाध्यक्ष ने विरोधस्वरूप होली नहीं खेलने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।

देवलोक के साथ सेटिंग करने का आरोप:

बाद में नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ गिरगिटों ने आरोप लगाया कि नेताओं ने देवलोक में भी सेटिंग करके रंग बदलने की प्रवृत्ति पर मोहर लगवा ली। उन्होंने इस मामले की जांच देवलोक की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) से करवाने की मांग की।

नारदजी ने कहा- गिरगिट बदलाव को स्वीकार करें:

इस बीच, देवलोक के प्रवक्ता नारदजी ने इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने संबंधी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “नेताओं के रंग बदलने के अधिकार को मान्यता उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर दी गई है। परिवर्तन सृष्टि का नियम है। गिरगिटों को इस बदलाव को स्वीकार कर नेताओं के साथ मिलजुलकर होली मनानी चाहिए।”

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की मानहानि करना नहीं।)

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