आजम खान की उसी भैंस का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू जो मंत्री पुत्र की तरह ‘मिसिंग’ हो गई थी!

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By Jayjeet

केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के पुत्र के मिसिंग होने की खबर क्या आई, उसमें वैल्यू एडिशन करने के चक्कर में रिपोर्टर पहुंच गया सीधे उसी वर्ल्ड फेमस भैंस के पास जिसे उप्र की पुलिस ने सालों पहले बड़ी मशक्कत के बाद ढूंढ निकाला था। आजम साहब की तरह आज भैंस भी बूढ़ी हो चुकी है, वैसी निस्तेज भी। पर रिपोर्टर को देखते ही पूछा-

भैंस : क्यों आए हो भैया?

रिपोर्टर : मैं रिपोर्टर।

भैंस : रिपोर्टर हो, यह तो शक्ल-सूरत से ही पता चल जाता है। पर आए क्यों हो? दूहने के लिए कुछ ना बचा मेरे पास।

रिपोर्टर : मैं जानता हूं, आपमें और देश में कोई अंतर नहीं रहा है।

भैंस : गलत बात। देश पर नेताओं-अफसरों का भरोसा बाकी है। अब भी उसमें बहुत कुछ बाकी है दूहने के लिए। इसीलिए अपनी दूसरी पीढ़ी के भी हाथ मजबूत करने में लगे हैं ताकि दोहते-दोहते जान चली जाए, पर हाथ ना थके। खैर, मुद्दे पर आओ।

रिपोर्टर : आपने तो दूसरी पीढ़ी की बात कहकर मेरे लिए बात आसान कर दी। मैं माननीय मंत्रीजी के उस सुपुत्र के संदर्भ में ही आपसे चर्चा करने आया हूं जिसे उप्र पुलिस अब तक ढूंढ नहीं पाई है। किसी जमाने में आपने भी पुलिस की नाक में दम कर दिया था। अपने अनुभव बताइए ना जरा।

भैंस : (शर्माते हुए) अब क्या बताऊं। वो तो मैं भैंस कुमार के चक्कर में जरा घर से बाहर निकल गई थी। वह पूरा मामला पर्सनल था, पर मंत्रीजी की भैंस होने के कारण पब्लिक हो गया था। फिर शर्मिंदगी से बचने के लिए मेरी चोरी और मिसिंग की रिपोर्ट दर्ज करवानी पड़ी।

रिपोर्टर : तो फिर पुलिस ने आपको ढूंढा कैसे?

भैंस : हूम..पुलिस क्या खाक ढूंढती। वो तो मुझे पता चला कि पुलिस हमारी ही किसी दूसरी बहन के साथ मारपीट कर उससे यह कबूलवाने की कोशिश कर रही थी कि वह वही भागी हुई भैंस यानी मैं हूं। यह अन्याय मैं कैसे देख सकती थी! तो पुलिस के पास खुद ही आ गई।

रिपोर्टर : पर आरोप यह है कि जब आप मिसिंग हुई थी तो आपको ढूंढने के लिए उप्र का पूरा पुलिस महकमा लग गया था। और अब मंत्री पुत्र मिसिंग है तो पुलिस हाथ पर हाथ धरकर बैठी है। कुछ ना कर रही।

भैंस : आप पत्रकारों की यही दिक्कत है। दूसरों ने आरोप लगा दिया और आपने मान लिया। भाई, यहां भी तो पूरा महकमा लगा है मंत्री पुत्र के लिए। वो जिस बंगले में ठहरा है, उसके आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर रखा है। उससे बाहर आने का सविनय अनुरोध किया गया है। जल्दी ही बाहर आ जाएगा। अब अगर पुलिस जोर-जबरदस्ती करती तो तुम्हीं लोग उसका इश्यू बना देते।

रिपोर्टर : पर वो तो आरोपी है। उसकी इतनी सुरक्षा?

भैंस : पुलिस के लिए वह केवल मंत्री पुत्र है। आरोप है तो कोर्ट को तय करने दो। बेचारी पुलिस को क्यों इस झमेले में डाल रहे हो। वह अपना कर्त्तव्य निभा रही है, उसे निभाने दो।

रिपोर्टर : आपको पुलिस के साथ बड़ी हमदर्दी है?

भैंस : जिस दिन आप वीआईपी बन जाआगे तो उस दिन से आपको भी पुलिस के साथ पूरी हमदर्दी हो जाएगी। पुलिस को समझना हर किसी के लिए आसान नहीं है। वीआईपी या वीआईपी पुत्र या वीआईपी भैंस बनकर ही पुलिस को समझा जा सकता है। आप जैसे आम आदमी टाइप के लोग क्या समझोगे। अब फिनिश कीजिए, मेरे ख्याल से आपका वैल्यू एडिशन हो गया होगा। टीवी चैनलों से फोन आने लगे हैं।

(ए. जयजीत संवाद की अपनी विशिष्ट शैली में लिखे गए तात्कालिक ख़बरी व्यंग्यों के लिए चर्चित हैं। मूलत: पत्रकार जयजीत फिलहाल भोपाल स्थित एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस में कार्यरत हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया तीनों का उन्हें लंबा अनुभव रहा है।)