#Board और यूनिवर्सिटी Exam : लड़कों ने क्यों की बोनस अंक देने की मांग?

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देखिए, अब इसमें हमें कितना टाइम देना पड़ता है...

हिंदी सटायर डेस्क। परीक्षाओं के नतीजों में हर बार लड़कियां ही आगे रहती हैं और इस कारण लड़कों को मीडिया आदि में काफी जिल्लत का सामना करना पड़ता है। ऐसी नौबत से बचने के लिए लड़कों ने उन्हें बोनस अंक देने की मांग करते हुए CBSE और विभिन्न यूनिवर्सिटियों को लेटर लिखे हैं। इस लेटर में लड़कों ने कहा है कि हमें और भी कई कर्त्तव्य निभाने पड़ते हैं। इसलिए CBSE और यूनिवर्सिटियों का दायित्व बनता है कि वे हमें बोनस अंक दें।

लड़कों ने ओपन लेटर में वे पांच कर्त्तव्य गिनाए हैं, जिनका उनके प्रदर्शन पर गहरा असर पड़ता है। ये रहे वे कर्त्तव्य :

1. लड़कियों की स्कूटी पंचर होने पर उसे ठीक करवाने का पुनीत कार्य हम लड़कों को करना पड़ता है। ऐसे समय में लड़कियां पढ़ाई करती हैं, जबकि हम लड़के धूप में खड़े होकर पंचर ठीक करवाते हैं।

2. लड़कों को क्रिकेट सीरीज, IPL के मैच वगैरह भी देखना होता है। इतना ही नहीं, सारे रिकॉर्ड भी मुंहजबानी याद रखने होते हैं। लड़कियों के लिए इसमें छूट का प्रावधान है।

3. लड़कियों को केवल अपना फेसबुक अकाउंट मेनटेन करना होता है, जबकि हम लड़कों को अपना ओरिजिनल अकाउंट के अलावा कम से कम चार फेक अकाउंट भी मेनटेन करने होते हैं। समय-समय पर इनकी प्रोफाइल पिक भी बदलनी होती है जिनके लिए खूबसूरत चेहरों को ढूंढ़ने पर भी काफी वक्त खर्च करना पड़ता है।

4. लड़कियों के होस्टल के बाहर रोजाना उनके गैलरी में आने का इंतजार करना पड़ता है। यह बहुत टाइम टेकिंग होता है, लेकिन जनहित में हम करते हैं।

5. परीक्षा के समय लड़कियों को गेस पेपर मुहैया करवाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है, जिसे हम राष्ट्रीय कर्त्तव्य समझकर निभाते हैं।

लड़कों ने सीबीएसई और यूनिवर्सिटियों को उपरोक्त पांच कर्त्तव्यों के बदले में कम से कम 10 फीसदी बोनस अंक देने का निवेदन किया है, ताकि वे फेल होने के भय से मुक्त होकर उपरोक्त कर्त्तव्य निभाते रहें।

(Disclaimer : वैसे तो यह खबर कपोल-कल्पित है। लेकिन कोई भी लड़का इसे अपनी जिंदगी से कनेक्ट कर सकता है।)