Thursday, September 24, 2020
Classics

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हरिशंकर परसाई के व्यंग्य , harishankar parsai satire

हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’

हरिशंकर परसाई चार बार मैं गणतंत्र दिवस का जलसा दिल्ली में देख चुका हूँ। पाँचवीं बार देखने का साहस नहीं हुआ। आखिर यह क्या बात...
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शरद जोशी का क्लासिक व्यंग्य ‘चौथा बंदर’

शरद जोशी एक बार कुछ पत्रकार और फोटोग्राफर गांधी जी के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि गांधी जी के तीन बंदर हैं। एक...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘अयोध्या में खाता-बही’

हरिशंकर परसाई पोथी में लिखा है - जिस दिन राम, रावण को परास्त करके अयोध्या आए, सारा नगर दीपों से जगमगा उठा। यह दीपावली पर्व...
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शरद जोशी का व्यंग्य – ‘अथ श्री गणेशाय नम:’ यानी देश के चूहों की...

शरद जोशी अथ श्री गणेशाय नम:, बात गणेश जी से शुरू की जाए, वह धीरे-धीरे चूहे तक पहुँच जाएगी। या चूहे से आरंभ करें और...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक हिंदी व्यंग्य ‘भारतीय राजनीति का बुलडोजर’

हरिशंकर परसाई राजनीति में बुलडोजर बहुत काम की चीज है। किसी को भी तोड़ना-फोड़ना हो तो बुलडोजर ही काम आता है। हर युग में यह...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य – किस्सा मुहकमा तालीमात

हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई (harishankar parsai) ने करीब 45 साल पहले यह व्यंग्य लिखा था। यह शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष था। इसके कुछ हिस्से आज...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘बकरी पौधा चर गई’

हरिशंकर परसाई (Harishankar Parsai) साधो, तुम सुनते आ रहे हो कि बागड़ खेत को खा ही गई और नाव नदी को ही लील गई और...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘ईश्वर की सरकार’

हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई (harishankar-parsai) ने यह व्यंग्य तब की जनता सरकार पर लिखा था। लेकिन इस व्यंग्य में किसी भी सरकार को फिट कर...
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हरिशंकर परसाई का क्लासिक व्यंग्य ‘नया खून – पुराना खून’

सन् 1962 के आम चुनावों के लिए पार्टी टिकटों की कोशिशें चल रही थीं। कांग्रेस में मांग उठ रही थी कि संसद, विधानसभाओं और...
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काका हाथरसी की हास्य-व्यंग्य कविता ‘सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा’

हिंदी सटायर डेस्क। हिंदी के जाने-माने हास्य-व्यंग्य कवि काका हाथरसी (kaka hathrasi) ने आज से सालों पहले 'सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा'...