गणेशजी के कान इतने बड़े क्यों हैं? नई स्टडी में हुआ नया खुलासा

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हिंदी सटायर डेस्क, देवलोक। गणेशजी के कान इतने बड़े और लंबे क्यों है, इसको लेकर देवलोक के वैज्ञानिकों की एक टीम ने नया दावा किया है। वैज्ञानिकों ने उस लॉजिक को खारिज कर दिया है कि हाथी का सिर लगाने के कारण गणेशजी के कान स्वाभाविक रूप से बड़े हैं। उनका कहना है कि भारत नामक देश में गणेशोत्सव समितियों के पांडालों में तेज आवाज में बजने वाले गाने गणेशजी के बड़े कानों की बड़ी वजह हैं।

डॉ. धन्वंतरि के परपोते प्रो. कर्मन्तरि (जूनियर) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय दल पिछले 7 साल की सघन रिसर्च के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा है। प्रो. कर्मन्तरि ने अपनी रिपोर्ट देवलोक सरकार को सौंप दी है। विसर्जन के बाद गणेशजी के वापस लौटने के बाद इस पर देवलोक संसद में चर्चा करवाए जाने की संभावना है। इस बीच, देवलोक के कट्‌टरपंथी संगठनों ने रिपोर्ट को बेसलेस बताते हुए खारिज कर दी है।

क्यों हुए बड़े और मोटे कान?

‘गणेश के बड़े कान : आवश्यकता और आविष्कार’ नामक इस रिसर्च में कहा गया है कि गणेशजी शुरू से ऐसे नहीं थे। उनके भी हम जैसे ही छोटे-छोटे सुंदर कान हुआ करते थे। लेकिन उन्होंने जब से भारत नामक देश में पांडालों में विराजमान होना शुरू किया है, उसके बाद से ही उनके कानों के आकार में बदलावा आना शुरू हो गया।

‘थ्योरी ऑफ डेवलपमेंट’ का हवाला देते हुए रिसर्च स्टडी में कहा गया, “प्रकृति का यह नियम ही है कि शरीर के जिस अंग का इस्तेमाल नहीं होता है, वह गायब हो जाता है। लेकिन जिसका इस्तेमाल ज्यादा होता है, उसका विकास बड़ी तेजी से होता जाता है। चिम्पैंजी के मनुष्य बनने के दौरान पूछ का इस्तेमाल नहीं होने के कारण वह गायब हो गई, जबकि दिमाग का इस्तेमाल अधिक होने के कारण वह बढ़ता गया है। इसी तर्ज पर गणेशोत्सव के दौरान पांडालों में होने वाले शोर को रोकने के फेर में मिस्टर गणेश के कानों का आकार बड़ा होता गया, साथ ही कान भी मोटे होते गए। जैसे-जैसे शोर बढ़ता गया, उसी अनुपात में कानों का इस्तेमाल भी बढ़ता गया और कान अधिक लंबे और मोटे होते गए।”

देवलोक का कट्‌टरपंथी धड़ा नाराज :

सूत्रों के अनुसार देवलोक का कट्टरपंथी धड़ा इस नई व्याख्या को स्वीकारने को तैयार नहीं है। विभिन्न संदर्भ ग्रंथों के हवाले से वह इस बात पर अड़ा हुआ है कि गणेशजी के बड़े कानों की पुरानी व्याख्या ही अधिक तार्किक है। इसमें धरतीवासियों को दोष देना ठीक नहीं है। देवलोक संसद में इस रिपोर्ट पर चर्चा काफी हंगामेदार होने की संभावना है।

(Disclaimer : यह खबर कपोल-कल्पित है। इसका मकसद केवल स्वस्थ मनोरंजन और सिस्टम पर कटाक्ष करना है, किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं।)