Satire : जब बेताल का फेसबुक लाइव होते-होते रह गया…

betal , betal ki kahani, vikram aur betal , Baital Pachchisi, Baital Pachisi, Jayjeet, satire, writer of Baital Pachchisi, political satire, बेताल पच्चीसी, बेताल पच्चीसी के रचनाकार, विक्रम और बेताल, विक्रम और बेताल जोक्स, विक्रम और बेताल कहानी

By Jayjeet

रिपोर्टर बरगद के पेड़ के नीचे फेसबुक चेक करने को रुका ही था कि अचानक उसकी बाइक की पिछली सीट पर अट्‌टहास करती एक आकृति कूद पड़ी। सामान्य काल होता तो रिपोर्टर चौंककर हॉस्पिटल में होता, लेकिन अब कोई भी घटना चौंकाती नहीं। आंखें थोड़ी फटी जरूर लेकिन मन में ब्रेकिंग न्यूज का सैलाब उमड़ने लगा। तो आंखों में डर की जगह चमक आ गई। चुपचाप से फोन का कैमरा चालू कर शुरू हो गया…

रिपोर्टर : अरे, बेताल जी, अचानक इतने दिनों बाद आप यहां कैसे?

बेताल : आपने मुझे पहचान लिया? घोर आश्चर्य…

रिपोर्टर : हां, आप तो बिल्कुल ना बदले। वैसे ही सेम टू सेम हैं। आपको बचपन में देखा था टीवी पर।

बेताल : हां, कुछ चीजें कभी ना बदलतीं। जैसे सिस्टम…

रिपोर्टर (बीच में रोकते हुए) : बस, बस…। इस पर काफी बात हो गई है। हम सब पक गए हैं सिस्टम-विस्टम की बातें सुनते-सुनते। आप तो कोई नई कहानी सुनाइए। … लेकिन राजा विक्रमादित्य कहां गए? उन्हें आप कहां छोड़कर आ गए?

(कोई जवाब नहीं दिया, बात बदलते हुए) बेताल : कहानी…! हां जरूर, लेकिन पहले तू कविता सुन। इन दिनों मैंने कविताएं भी शुरू की हैं…

रिपोर्टर : अच्छा, अब समझा कि महाराज विक्रमादित्य क्यों गायब हो गए…

(इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, अपनी बात कन्टीन्यू करते हुए) बेताल: मस्त कविता है, सुन…फिर कहानी भी सुनाता हूं…

रिपोर्टर : चलिए, सुनाइए, अगर कहानी सुनाने की यही शर्त है तो…

बेताल : मुर्दा बोला मुर्दे से, क्या है तेरी औकात। अब क्या बचा इस दुनिया में, कर लें मन की बात…। ओ बेटा, ओ बाबू, कर लें मन की बात…(ढाई-तीन मिनट तक तुकबंदियों का यह भयंकर तूफान चलता रहा)

रिपोर्टर : यह तो सोशल मीडिया से चुराई हुई है, मैंने कहीं पढ़ी है! शायद रवीश की वॉल पर। ओह नो, मतलब आप सोशल मीडिया पर भी…!!

बेताल : मैं तो नहीं हूं। हां, बीते दिनों विक्रम ने जरूर सोशल मीडिया ज्वॉइन किया था। हो सकता है उन्होंने ही वायरल की हो मेरी कविताएं…

रिपोर्टर : अच्छा, पर आप तो कहानी ही सुनाइए, वही आपकी यूएसपी है

बेताल : तो अब कहानी सुन…। और ये तेरे कैमरे के फोकस को भी ठीक कर लें। मेरा पूरा चेहरा नहीं आ पा रहा।

रिपार्टर : जी, बिल्कुल। अब तो फेसबुक लॉइव कर दिया, पूरा देश सुन रहा है…सुनाइए …

बेताल (नाराज होते हुए) : अरे, क्या राष्ट्र के नाम संबोधन है जो पूरे देश को सुना रहा है?

रिपोर्टर : आप चिंता मत कीजिए। राष्ट्र के नाम संबोधन भी कहानीनुमा ही होते हैं। आप तो शुरू कीजिए।

बेताल : अभी कैमरा बंद कर। थोड़ा मेक-अप तो करने दें। राष्ट्र के नाम संबोधन में तो आदमी को गेट-अप में दिखना चाहिए।

रिपोर्टर : पर एक्चुअल में आप राष्ट्र के नाम संबोधन नहीं दे रहे। आपको तो कहानी सुनाना है। और हिंदी में कहानियां सुनाने वाला आप जैसा थोड़ा विनीत ही दिखना चाहिए (विनीत की जगह फटीचर पढ़ें, पर रिपोर्टर बेताल से यह कहने की हिम्मत न कर सका।)

बेताल : ठीक है, मैं कहानी तो सुनाऊंगा। पर तुझे मालूम ही है कि कहानी के अंत में मैं एक सवाल भी पूछता हूं। पर समस्या यह है कि जब पूरा देश मुझे सुन रहा होगा तो जवाब कौन देगा? हर कोई जवाब देने लगेगा तो भगदड़ नहीं मच जाएगी?

रिपोर्टर : इसकी चिंता मत कीजिए। कोई जवाब नहीं मिलने वाला आपको। जो जवाबदेह हैं, वे भी आपको जवाब नहीं देंगे। बची पब्लिक। तो उसका काम तो हाथ पर हाथ धरके केवल सुनना ही रहा है। आज से नहीं, सालों से। कभी भाषण सुन लेती है, कभी भागवत कथा तो कभी राष्ट्र के नाम संबोधन। थोड़ा-बहुत टाइम बच जाता तो क्रिकेट की कॉमेन्ट्री सुन लेती।

बेताल : पर, जवाब पता होते हुए भी अगर कोई जवाब नहीं देता है तो उसके सिर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। यह शाश्वत नियम है। विक्रम भी इसका पालन करता है।

रिपोर्टर : आप नियम-वियम छोड़िए, कहानी सुनाइए। हम सब एंटरटेनमेंट पसंद लोग हैं…

बेताल: अबे, मुझे क्या फालतू समझा? तुम लोगों से तो विक्रम ही ठीक थे। मुझे ध्यान से सुनते तो थे और जवाब भी देते थे।

रिपोर्टर : पर ये राजा विक्रमादित्य हैं कहां? मैं आपसे लगातार वही तो पूछ रहा हूं इतनी देर से? आप टाल रहे हैं। बताइए ना, पूरा देश वॉन्ट्स टू नो…, मैं कैमरा ऑन करता हूं…

बेताल (ठंडी आहें भरते हुए) : वे तो गंगा के किनारे बैठे हैं। बहते शवों को देखकर इतने डिप्रेस हो गए कि उल-जुलूल बोलने लगे। न्याय-व्याय, शासन व्यवस्था जैसी बातें करने लगे। मैंने कहा कि कहां अपने जमाने की पोंगा-पंडित टाइपकी बातें लेकर बैठ गए। तो मुझसे बहस हो गई और मैं उन्हें वहीं छोड़कर यहां उड़ आया। पर अब मैं उनके पास ही जा रहा हूं। पता नहीं, किस हाल में होंगे बेचारे…

और बेताल, फेसबुक लाइव शुरू होने से पहले ही ह हा हा करते हुए लौट चला… बेचारा रिपोर्टर उसका केवल हवा में जाते हुए फोटो ही खींच सका, वो भी धुंधला-सा (देखें तस्वीर)

 # betal  # betal ki kahani # vikram aur betal # Baital Pachchisi